फतेहपुर (कांगड़ा) 08/ मार्च 2026. राज्य ब्यूरो चीफ विजय समयाल

हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा (NSQF) के तहत शुरू की गई वोकेशनल शिक्षा विद्यार्थियों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा कर रही है। कक्षा 9वीं से 12वीं तक विद्यार्थियों को विभिन्न ट्रेड्स में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे पढ़ाई के साथ-साथ तकनीकी कौशल भी सीख रहे हैं।

जिला कांगड़ा के फतेहपुर स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय फतेहपुर में भी इस योजना के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। विद्यालय में आईटीईएस (ITES) और ऑटोमोबाइल विषय पढ़ाए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से विद्यार्थियों को कंप्यूटर सेवाओं और वाहन तकनीक से संबंधित व्यावहारिक ज्ञान दिया जा रहा है।

स्कूल के ऑटोमोबाइल ट्रेड के छात्रों ने अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता का परिचय देते हुए कबाड़ और पुराने वाहन पार्ट्स से Himachal Road Transport Corporation (HRTC) बस, जेसीबी, ट्रैक्टर और क्रेन के आकर्षक मॉडल तैयार किए हैं। इन मॉडलों को देखकर स्पष्ट होता है कि विद्यार्थियों ने सीमित संसाधनों में भी अपनी तकनीकी समझ और मेहनत का शानदार प्रदर्शन किया है।
मारुति कंपनी में दे रहे सेवाएं

विद्यालय के शिक्षकों के अनुसार फतेहपुर स्कूल से पढ़ाई कर चुके लगभग 16 छात्र आज Maruti Suzuki में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं कुछ छात्रों ने स्वयं का काम शुरू कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाया है। यह उपलब्धि न केवल विद्यालय के लिए गर्व की बात है बल्कि वर्तमान विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है।

वोकेशनल शिक्षा से मिल रहा प्रैक्टिकल ज्ञान
ऑटोमोबाइल शिक्षक रविन्द्र सिंह का कहना है कि वोकेशनल शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रैक्टिकल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे वे तकनीकी रूप से दक्ष बन रहे हैं और भविष्य में रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त कर सकते हैं।
कबाड़ से बनाए आकर्षक मॉडल

ऑटोमोबाइल शिक्षक युद्धबीर सिंह के अनुसार विद्यार्थियों को प्रयोग करने और नई चीजें सीखने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जाता है। छात्रों द्वारा कबाड़ सामग्री से तैयार किए गए वाहन मॉडल उनकी रचनात्मकता और तकनीकी समझ का प्रमाण हैं। यह पहल दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी भी बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।

