न्यूज़ इंडिया आजतक , . .दिनांक: 08 मार्च 2026 .लेखिक राज्य ब्यूरो चीफ विजय समयाल
नियमों के जाल में उलझी बीपीएल चयन प्रक्रिया, फतेहपुर में 4600 के लक्ष्य के मुकाबले केवल 780 परिवार चयनित
फतेहपुर (कांगड़ा):
गरीब परिवारों को राहत देने के उद्देश्य से बनाई गई बीपीएल चयन प्रक्रिया अब स्वयं नियमों के जाल में उलझती दिखाई दे रही है। जिला कांगड़ा के विकास खंड फतेहपुर में स्थिति यह है कि करीब आठ माह बीत जाने के बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है और हजारों जरूरतमंद परिवार अब भी सूची में शामिल होने का इंतजार कर रहे हैं।
सरकार और संबंधित विभाग द्वारा बीपीएल चयन के लिए बनाए गए नियमों में बार-बार बदलाव ने इस प्रक्रिया को और अधिक जटिल बना दिया है। अब तक पांच बार नियमों और शर्तों में परिवर्तन किए जा चुके हैं। इन कठोर मानदंडों के चलते कई पंचायतों के तत्कालीन प्रधानों और पंचायत प्रतिनिधियों ने भी चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में असमर्थता जताते हुए अपने हाथ खड़े कर दिए थे। इसके बाद सरकार ने विभागीय समितियों का गठन कर यह जिम्मेदारी अधिकारियों और कर्मचारियों को सौंप दी, लेकिन जमीनी स्तर पर यह काम उनके लिए भी आसान नहीं रहा।
विकास खंड फतेहपुर की 68 पंचायतों में करीब 4600 परिवारों को बीपीएल सूची में शामिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। लेकिन चार चरणों की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अब तक केवल करीब 780 परिवार ही पात्रता के मानदंडों पर खरे उतर पाए हैं। जबकि क्षेत्र की आबादी डेढ़ लाख से अधिक है और बड़ी संख्या में आर्थिक रूप से कमजोर परिवार अभी भी सूची में जगह पाने की आस लगाए बैठे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि नियमों में लगातार बदलाव होने से प्रक्रिया उलझती जा रही है। कई ऐसे परिवार भी सामने आए हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं, लेकिन निर्धारित मानदंडों की कसौटी पर खरे नहीं उतर पा रहे और सूची से बाहर रह जा रहे हैं।
मनरेगा की शर्त भी बनी बाधा
बीपीएल चयन के लिए बनाए गए नए प्रावधानों में मनरेगा की शर्त भी कई परिवारों के लिए चुनौती बन गई है। नियमों के अनुसार पिछले वित्तीय वर्ष में मनरेगा के तहत कम से कम 50 दिन कार्य करना अनिवार्य माना गया है। इससे पहले यह सीमा 100 दिन रखी गई थी, जिसे पांचवें चरण में घटाकर 50 दिन किया गया है।
फिर भी कई गरीब परिवारों को मनरेगा में नियमित काम नहीं मिल पाता, जबकि कुछ लोग खेती-बाड़ी या अन्य दिहाड़ी कार्यों में व्यस्त रहने के कारण मनरेगा में काम नहीं कर पाते। ऐसे में यह शर्त उनके लिए बाधा बन रही है।
सरकार ने दिया नया अवसर
हालांकि सरकार ने पांचवें चरण में कुछ राहत भी दी है। अब ऐसे परिवारों को भी आवेदन का अवसर दिया गया है जिनके सभी वयस्क सदस्यों ने पिछले वित्तीय वर्ष में मनरेगा के तहत कम से कम 50 दिन कार्य किया हो। इसके बावजूद यह सवाल बना हुआ है कि यदि कोई पात्र परिवार मनरेगा में निर्धारित दिनों तक काम नहीं कर पाया तो क्या वह बीपीएल सूची से बाहर ही रह जाएगा।
12 मार्च तक आवेदन, 15 मार्च को सूची
ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार इस श्रेणी में आने वाले आवेदनों पर पहले से प्राप्त आवेदनों के साथ भी विचार किया जाएगा। साथ ही नए आवेदन भी आमंत्रित किए गए हैं, जिनकी अंतिम तिथि 12 मार्च निर्धारित की गई है।
इसके बाद प्रक्रिया पूरी कर 15 मार्च 2026 तक खंड स्तरीय समिति द्वारा पंचायत-वार बीपीएल की पांचवें चरण की सूची प्रकाशित की जाएगी।
विकास खंड अधिकारी सुभाषा अत्री ने बताया कि फतेहपुर ब्लॉक में बीपीएल चयन की प्रक्रिया सरकार और विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार जारी है तथा तय मानदंडों के आधार पर ही पात्र परिवारों का चयन किया जाएगा।
फिलहाल स्थिति यह है कि उम्मीदों की कतार लंबी है, लेकिन नियमों की कसौटी इतनी कड़ी कि हजारों गरीब परिवार अभी भी बीपीएल सूची में अपने नाम की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

