वीरता, पराक्रम और राष्ट्रभक्ति को नमन
SHIMLA,27 JAN 2027,EDITOR RAM PARKASH VATS
भारत माता की आन-बान-शान की रक्षा के लिए अपने प्राणों की परवाह किए बिना रणभूमि में डट जाने वाले वीर सपूतों की गाथाएँ ही राष्ट्र की आत्मा को शक्ति प्रदान करती हैं। कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मन के नापाक इरादों को ध्वस्त कर भारत की विजय पताका फहराने वाले हिमाचल प्रदेश के गौरव, परमवीर चक्र विजेता सूबेदार मेजर संजय कुमार जी ऐसे ही अद्वितीय योद्धा हैं, जिनका नाम स्वर्ण अक्षरों में देश के सैन्य इतिहास में अंकित है।
77वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर विजय चौक, नई दिल्ली में उन्हें पदोन्नति प्रदान कर कैप्टन बनाए जाने का क्षण सम्पूर्ण राष्ट्र के लिए गर्व और गौरव से परिपूर्ण रहा। यह सम्मान केवल एक पदोन्नति नहीं, बल्कि उस अदम्य साहस, अतुलनीय पराक्रम और निःस्वार्थ बलिदान की राष्ट्र द्वारा की गई वंदना है, जो उन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए प्रदर्शित किया। वीरभूमि हिमाचल प्रदेश के लिए यह क्षण विशेष रूप से ऐतिहासिक है, क्योंकि यहां की धरती सदैव से ही देश को शूरवीर और राष्ट्रभक्त सपूत देती रही है।
कारगिल की दुर्गम चोटियों पर, भीषण ठंड और गोलियों की बौछार के बीच, सूबेदार मेजर संजय कुमार जी ने जिस निर्भीकता और धैर्य का परिचय दिया, वह भारतीय सैनिक की अटूट संकल्पशक्ति का प्रतीक है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि जब हृदय में राष्ट्रभक्ति की ज्वाला प्रज्वलित हो, तो कोई भी बाधा अपराजेय नहीं रह जाती।
उनका साहस और समर्पण न केवल भारतीय सेना के जवानों के लिए, बल्कि देश के युवाओं के लिए भी एक अमिट प्रेरणा है। वे हमें सिखाते हैं कि राष्ट्र सर्वोपरि है और उसकी रक्षा के लिए किया गया प्रत्येक त्याग सबसे बड़ा धर्म है। आज पूरा देश, विशेषकर हिमाचल प्रदेश, इस महान योद्धा पर गर्व करता है और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए मंगलकामनाएँ करता है।

