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सड़क सुरक्षा की नई पहल: क्या पूरे देश में लागू हो बिहार मॉडल….?

RamParkash Vats
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लेखक संपादक राम प्रकाश वत्स (न्यूज इंडिया आजतक)

बिहार सरकार द्वारा ट्रैफिक नियमों के पालन को लेकर लागू की गई नई व्यवस्था एक सकारात्मक और दूरदर्शी कदम मानी जा सकती है। इस व्यवस्था के तहत अब आम नागरिक भी सड़क पर ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों की शिकायत कर सकेंगे। यदि कोई वाहन चालक रेड लाइट तोड़ता है, बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाता है, सीट बेल्ट का प्रयोग नहीं करता अथवा अन्य यातायात नियमों की अनदेखी करता है, तो आम व्यक्ति उसकी फोटो या वीडियो बनाकर संबंधित विभाग को भेज सकता है।

शिकायत सही पाए जाने पर वाहन चालक के खिलाफ ई-चालान जारी किया जाएगा।यह पहल केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़क सुरक्षा को जनभागीदारी से जोड़ने का एक प्रभावी प्रयास भी प्रतीत होती है। भारत में हर वर्ष हजारों सड़क दुर्घटनाएं केवल ट्रैफिक नियमों की अनदेखी के कारण होती हैं। तेज रफ्तार, गलत दिशा में वाहन चलाना, मोबाइल पर बात करते हुए ड्राइविंग, हेलमेट और सीट बेल्ट का प्रयोग न करना—ये सभी लापरवाहियां अनगिनत परिवारों को दर्द और दुख दे चुकी हैं।

ऐसे में बिहार सरकार की यह व्यवस्था दुर्घटनाओं में कमी लाने की दिशा में कारगर साबित हो सकती है। जब वाहन चालकों को यह अहसास होगा कि केवल पुलिस ही नहीं, बल्कि आम नागरिक भी नियम उल्लंघन की सूचना दे सकते हैं, तो निश्चित रूप से लोग अधिक सतर्क होकर वाहन चलाने के लिए बाध्य होंगे। इससे ट्रैफिक नियमों के पालन की प्रवृत्ति बढ़ेगी और सड़क पर अनुशासन भी मजबूत होगा।

हालांकि, किसी भी व्यवस्था के सफल क्रियान्वयन के लिए पारदर्शिता और निष्पक्षता जरूरी है। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो और किसी प्रकार की निजी दुश्मनी, झूठी शिकायत या दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई को बढ़ावा न मिले। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखने का निर्णय भी सराहनीय है, जिससे लोग बिना भय के यातायात व्यवस्था सुधारने में सहयोग कर सकेंगे।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि बिहार में यह मॉडल सफल सिद्ध होता है, तो इसे केवल एक राज्य तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। सड़क दुर्घटनाएं किसी एक प्रदेश की समस्या नहीं, बल्कि पूरे देश की चिंता हैं। इसलिए केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर ऐसी व्यवस्था को संपूर्ण भारत में लागू करने पर विचार करना चाहिए।

आज आवश्यकता केवल सख्त कानूनों की नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी की है। यदि नागरिक और प्रशासन मिलकर यातायात नियमों के पालन को जनआंदोलन का रूप दें, तो निश्चित रूप से दुर्घटनाओं में कमी आएगी और हर वाहन चालक ट्रैफिक नियमों का पालन करने के लिए बाध्य होगा। सड़क सुरक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हम सभी की साझी जिम्मेदारी है।

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