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धार्मिक दृष्टि से पक्षियों को दाना-पानी देना भारतीय सनातन परंपरा में करुणा, जीव-दया और सेवा भाव का श्रेष्ठ उदाहरण माना गया है।

RamParkash Vats
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न्यूज इंडिया आज तक संपादक राम प्रकाश वत्स

धार्मिक दृष्टि से पक्षियों को दाना-पानी देना भारतीय सनातन परंपरा में करुणा, जीव-दया और सेवा भाव का श्रेष्ठ उदाहरण माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस सृष्टि में प्रत्येक जीव में ईश्वर का अंश विद्यमान है, इसलिए बेजुबान पक्षियों की सेवा करना सीधे-सीधे परमात्मा की उपासना के समान है। जब मनुष्य पक्षियों की भूख और प्यास को शांत करता है, तो उसका अहंकार कम होता है और हृदय में दया, प्रेम व संतोष का भाव जागृत होता है, जिससे आत्मिक शांति प्राप्त होती है।
धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार पक्षियों की सेवा से ग्रह दोषों का शमन भी होता है। नियमित रूप से पक्षियों को दाना डालने और जल पात्र रखने से शनि, राहु-केतु जैसे क्रूर ग्रहों के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं, जबकि बुध ग्रह की कृपा से बुद्धि, वाणी और व्यापार में प्रगति के योग बनते हैं। यह सेवा न केवल कर्मों को शुद्ध करती है, बल्कि व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर वातावरण को पवित्र और मंगलमय बनाती है।
मान्यता है कि जिस घर में पक्षियों का आगमन बना रहता है, वहां नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं और देवी-देवताओं की कृपा सहज रूप से प्राप्त होती है। पक्षियों को दाना-पानी देने से पितृ संतुष्ट होते हैं, पितृ दोष का निवारण होता है और रुके हुए कार्य पूर्ण होने लगते हैं। इस प्रकार एक छोटा-सा सेवा भाव न केवल पुण्य का कारण बनता है, बल्कि जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का द्वार भी खोल देता है।

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