आज मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने हाल ही में धारा-118 को लेकर बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा, “धारा-118 सुरक्षित है -असुरक्षित नहीं तो सिर्फ़ झूठ की राजनीति।” उनके इस बयान का उद्देश्य राजनीतिक दलों द्वारा फैलाई जा रही अफवाहों और भ्रांतियों को समाप्त करना बताया जा रहा है।
Vedio मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह सुख्खू सम्बोधित करते हुए
मुख्यमंत्री का यह बयान उन खबरों और सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के मद्देनजर आया, जिनमें यह दावा किया जा रहा था कि धारा-118 का कोई कानूनी या सुरक्षा खामियाँ हैं।
धारा-118 मुख्य रूप से प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी मामलों को नियंत्रित करती है। मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कहा कि सरकार इस धारा को पूरी तरह से पारदर्शिता और सुरक्षा मानकों के साथ लागू कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीतिक विरोधी दल केवल जनसामान्य को भ्रमित करने के लिए इस मुद्दे को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं।

चिंतन मंथन और विश्लेषण: सपादक राम प्रकाश वत्स
(धारा 118 क्या है यह जानना अनिवार्य है)
#धारा-118 हिमाचल प्रदेश के लिए केवल एक कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि राज्य की भूमि, पर्यावरण और सामाजिक पहचान की रक्षा करने वाला सुरक्षा कवच है। सीमित पर्वतीय भू-भाग वाले इस राज्य में यह धारा स्थानीय लोगों की जमीन को बाहरी उद्योगपतियों, बिल्डरों और पूंजीपतियों की अंधाधुंध खरीद से बचाती है तथा किसानों-बागवानों की आजीविका को सुरक्षित रखती है। बिना नियंत्रण भूमि खरीद से जनसांख्यिकीय असंतुलन पैदा होता, जिससे स्थानीय संस्कृति, भाषा और सामाजिक संरचना पर गंभीर असर पड़ता, जिसे धारा-118 प्रभावी रूप से रोकती है। साथ ही, यह प्रावधान अनियंत्रित निर्माण, वनों की कटाई, भूस्खलन और जलस्रोतों के क्षरण पर अंकुश लगाकर पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है। यद्यपि राज्य सरकार उद्योग, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य अथवा विशेष विकास परियोजनाओं के लिए सख्त शर्तों और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत सीमित छूट दे सकती है, लेकिन इस धारा को कमजोर करना प्रदेश के किसानों, पर्यावरण और सामाजिक ढांचे के लिए घातक साबित हो सकता है। सही मायनों में, धारा-118 संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने की कुंजी है, जिसे बनाए रखना प्रदेशहित में अनिवार्य है#
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सरकारी सूत्रों का कहना है कि धारा-118 के तहत लागू प्रक्रियाएँ संविधान और राज्य के नियमों के अनुरूप हैं और इसमें किसी भी प्रकार की संवैधानिक समस्या नहीं है। मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि यदि कोई व्यक्ति या दल इस धारा को लेकर भ्रम फैला रहा है, तो उसका उद्देश्य केवल राजनीतिक लाभ उठाना है, न कि वास्तविक समस्या का समाधान करना।
विश्लेषकों के अनुसार, मुख्यमंत्री सुक्खू का यह बयान राज्य में राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने और अफवाहों को नियंत्रित करने के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने जनता से अपील की कि वे केवल विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी लें और बिना सत्यापित तथ्य के किसी भी प्रकार की राजनीति में न फँसे।
मुख्यमंत्री का यह कड़ा संदेश राजनीतिक विरोधियों के लिए चेतावनी के रूप में भी देखा जा रहा है, साथ ही यह जनता को यह विश्वास दिलाने का प्रयास है कि सरकार सभी कानूनी प्रावधानों को सुरक्षित और सही तरीके से लागू कर रही है।

