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77वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर प्रस्तुत की जाने वाली ‘ऑपरेशन सिंदूर: संयुक्तता से विजय’ झांकी केवल एक सैन्य प्रदर्शन नहीं, बल्कि बदलते भारत के सुरक्षा दर्शन की स्पष्ट और मुखर घोषणा है। यह झांकी उस भारत की तस्वीर पेश करती है जो अब प्रतिक्रिया देने वाला नहीं, बल्कि पहले पहचानने, पहले निर्णय लेने और निर्णायक रूप से कार्रवाई करने की क्षमता रखता है।

NEWS INDIA AAJ TAK .COM EDITOR RAM PARKASH VATS
प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत @2047 के विज़न से प्रेरित ‘ऑपरेशन सिंदूर’ इस बात का प्रमाण है कि भारत की रक्षा शक्ति अब आयात-निर्भर नहीं, बल्कि स्वदेशी तकनीक, संयुक्त कमान और रियल-टाइम समन्वय पर आधारित है। तीनों सेनाओं—थल, जल और वायु—का यह त्रिपक्षीय समन्वय भारत के सैन्य इतिहास में एक परिपक्व और आत्मविश्वासी चरण का संकेत देता है।

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झांकी का आरंभ भारतीय नौसेना की समुद्री प्रभुत्व क्षमता से होता है, जो यह संदेश देती है कि भारत अपने समुद्री हितों की रक्षा के लिए पूर्णतः सक्षम है। इसके बाद भारतीय सेना की एम-777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर और आकाश वायु रक्षा प्रणाली यह स्पष्ट करती हैं कि जमीनी और हवाई सुरक्षा अब एकीकृत ढांचे के तहत काम कर रही है। यह केवल हथियारों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि रणनीतिक सोच का प्रतीक है।
झांकी का केंद्र बिंदु भारत के नए ‘न्यू नॉर्मल’ सुरक्षा सिद्धांत को रेखांकित करता है—तेज़, नियंत्रित और सटीक जवाब। हारोप ड्रोन से दुश्मन के रडार का ध्वंस, राफेल द्वारा सर्जिकल स्ट्राइक और सुखोई-30 एमकेआई से ब्रह्मोस मिसाइल का प्रहार, यह दर्शाता है कि भारत अब सीमित लेकिन निर्णायक कार्रवाई में दक्ष हो चुका है। यह संदेश स्पष्ट है कि आतंक और उसके संरक्षकों के लिए कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं बचेगा।
इस सैन्य कथा का शिखर S-400 वायु रक्षा प्रणाली के प्रदर्शन के साथ आता है, जो भारत की दूरगामी निगरानी और अभेद्य सुरक्षा कवच का प्रतीक है। “पहले देखो, पहले फैसला करो और पहले खत्म करो”—यह अब केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि व्यावहारिक क्षमता है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ यह भी रेखांकित करता है कि भारत की ताकत केवल हथियारों में नहीं, बल्कि एकीकृत इंटेलिजेंस, सटीक लक्ष्य चयन और न्यूनतम क्षति के साथ उद्देश्य प्राप्त करने की रणनीति में है। यह झांकी आतंकवाद के प्रति भारत की शून्य सहनशीलता नीति को दो टूक शब्दों में प्रस्तुत करती है।
अंततः, यह झांकी ‘ब्रांड इंडिया डिफेंस’ की विश्वसनीयता को मजबूत करती है। स्वदेशी रक्षा प्रणालियां, तीनों सेनाओं का तालमेल और नागरिक-सैन्य समन्वय—ये सब मिलकर एक ऐसे भारत की तस्वीर बनाते हैं जो न केवल अपनी रक्षा करने में सक्षम है, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर निर्णायक नेतृत्व भी करता है।‘ऑपरेशन सिंदूर’ एक सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक चेतावनी है—एकजुटता ही अब उसकी सबसे बड़ी शक्ति और पहचान है।

