UNA,(SHIMLA)/17/01/2026/SCB VIJAY SAMYAL:मृत्यु का कोई निश्चित समय नहीं होता। जीवन की डोर कब अचानक टूट जाए, इसका कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता। जो व्यक्ति सुबह घर से हँसते-मुस्कुराते, अपने कर्तव्य को निभाने निकलता है, वही कुछ ही घंटों बाद नश्वर देह बनकर लौट आए—यह सच स्वीकार करना बेहद पीड़ादायक होता है। ऐसी ही हृदय विदारक घटना हिमाचल प्रदेश के ऊना ज़िले में सामने आई, जिसने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया।
शनिवार की सुबह राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला अंदौरा (अंब, ऊना) में रोज़ की तरह पढ़ाई चल रही थी। कक्षा 12वीं में अंग्रेज़ी विषय के शिक्षक धर्मेंद्र कुमार अपने निर्धारित पीरियड के लिए पहुंचे। 55 वर्षीय धर्मेंद्र कुमार एक अनुशासित, कर्मठ और विद्यार्थियों के प्रिय शिक्षक थे। क्लास में प्रवेश करते ही वे अपनी आदत के अनुसार विद्यार्थियों के बीच राउंड लेने लगे—शायद किसी को यह आभास भी नहीं था कि यह उनके जीवन का अंतिम पीरियड होगा।
अचानक उनकी चाल डगमगाई, चेहरा पीला पड़ा और वे चक्कर खाकर कक्षा में ही फर्श पर गिर पड़े। पल भर में कक्षा का वातावरण बदल गया। बच्चों की चीख-पुकार गूंज उठी। मासूम आंखों के सामने अपने शिक्षक को यूं गिरते देख बच्चे सहम गए। शोर सुनकर आसपास के कमरों से शिक्षक और स्कूल स्टाफ दौड़ते हुए पहुंचे। बिना देर किए उन्हें निजी वाहन से सिविल अस्पताल अंब ले जाया गया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
अस्पताल में मौजूद चिकित्सक ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक तौर पर मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया गया। यह खबर जैसे ही स्कूल और क्षेत्र में फैली, हर चेहरा ग़म से भर गया। जो शिक्षक सुबह सकुशल घर से ड्यूटी पर निकले थे, कुछ ही घंटों बाद उनका पार्थिव शरीर घर पहुंचा। घर में कोहराम मच गया, परिजनों की चीख-पुकार ने हर किसी की आंखें नम कर दीं।धर्मेंद्र कुमार के आकस्मिक निधन से न केवल उनका परिवार, बल्कि पूरा शिक्षा जगत शोक में डूब गया। स्कूल के प्रधानाचार्य और सहकर्मियों ने उन्हें एक मिलनसार, कर्तव्यनिष्ठ और आदर्श शिक्षक बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग ने आज एक सच्चा मार्गदर्शक खो दिया है, जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।
शनिवार सायं उनकी अंतिम यात्रा में सैकड़ों लोग शामिल हुए। नम आंखों और भारी मन से सभी ने उस शिक्षक को अंतिम विदाई दी, जिसने जीवन भर ज्ञान की ज्योत जलाने का कार्य किया और अंत तक अपने फर्ज का निर्वहन करते हुए इस संसार से विदा हो गया।
यह घटना हमें फिर याद दिलाती है—जीवन क्षणभंगुर है, इसलिए हर पल को मानवीयता, कर्तव्य और प्रेम के साथ जीना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।

