JAWALI.17 Jan 2026/NIAT Office Crime Investigation Reporter Dr. Navneet Kumar Sharma
VIEDO:Women narrating their problems that the problem of water has been severe for centuries, but the department is falling on deaf ears.
हरसर ग्राम पंचायत की तस्वीर आज उस व्यवस्था पर करारा तमाचा है, जिसकी जिम्मेदारी आमजन को बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराने की है। आमतौर पर जल संकट की बातें गर्मियों में सुनाई देती हैं, लेकिन जब ठंड के मौसम में भी लोगों को पीने के पानी के लिए तरसना पड़े, तो यह केवल तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और व्यवस्था की विफलता का स्पष्ट प्रमाण बन जाता है।
जल शक्ति विभाग जवाली के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत हरसर में हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि लोगों को पांच-छह दिन बाद नाममात्र पानी नसीब हो रहा है। वह भी केवल 30–35 मिनट की सप्लाई, जिसमें न तो घरों की टंकियां भर पा रही हैं और न ही शौचालयों की टंकियां। नतीजा यह कि लोग मजबूरी में टैंकरों से पानी मंगवा रहे हैं या फिर दूरदराज के कुओं और हैंडपंपों से पानी ढोने को विवश हैं।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस पीड़ा का बोझ महिलाओं के कंधों पर डाल दिया गया है।
वार्ड नंबर पांच की महिलाओं ने खाली बर्तन हाथ में लेकर जब सड़कों पर उतरकर विरोध जताया, तो यह केवल प्रदर्शन नहीं था, बल्कि प्रशासन को झकझोरने वाली चीख थी। 60–70 वर्ष की उम्र में महिलाओं को सिर पर घड़े उठाकर कुओं से पानी लाना पड़ रहा है—यह दृश्य किसी विकसित राज्य की नहीं, बल्कि उपेक्षा की पराकाष्ठा का प्रतीक है।
महिलाओं का कहना है कि ट्यूबवेल लंबे समय से खराब पड़ा है और कई दिनों से नलों में पानी नहीं आया। जब इस बारे में विभागीय जेई से संपर्क किया गया, तो समस्या को गंभीरता से लेने के बजाय अनसुना कर दिया गया। यही वह बिंदु है जहाँ सवाल उठता है—क्या जनता की समस्या सुनना अब विभागीय जिम्मेदारी नहीं रही?
अगर सर्दियों में भी हालात ऐसे हैं, तो आने वाली गर्मियों में स्थिति कितनी भयावह होगी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। यह संकट प्राकृतिक नहीं, बल्कि मानव-निर्मित लापरवाही का नतीजा है। समय पर रखरखाव, वैकल्पिक व्यवस्था और जवाबदेही होती, तो हालात यहां तक नहीं पहुंचते।
हालांकि अधिशाषी अभियंता अजय शर्मा ने जल्द समाधान का आश्वासन दिया है, लेकिन सवाल यह है कि आश्वासन कब अमल में बदलेगा?
क्योंकि हरसर के लोग अब भरोसे से नहीं, बल्कि मजबूरी से जी रहे हैं। महिलाओं ने साफ चेतावनी दी है कि यदि एक-दो दिन में समाधान नहीं हुआ तो वे अधिशाषी अभियंता से मिलेंगी और उसके बाद विभागीय कार्यालय का घेराव किया जाएगा।
यह आंदोलन केवल पानी के लिए नहीं है, यह सम्मान, अधिकार और जवाबदेही की लड़ाई है।
अब जरूरत है कि जल शक्ति विभाग आश्वासन नहीं, ठोस और तत्काल कार्रवाई करे—वरना इतिहास गवाह है, जब सब्र टूटता है, तो खाली बर्तन सबसे तेज़ आवाज़ करते हैं।

