शिमला, 16 दिसंबर2025/SBC,Vijay samyal
हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार द्वारा धारा 118 में संशोधन को लेकर पेश किए गए विधेयक के खिलाफ हिंदू रक्षा मंच ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। मंच ने प्रस्तावित संशोधन को प्रदेश के हितों के विरुद्ध बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार भू-माफिया के दबाव में काम कर रही है। इस संबंध में मंच की ओर से उपायुक्त के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा गया है।
हिंदू रक्षा मंच के प्रदेश अध्यक्ष कमल गौतम ने शिमला में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि धारा 118 हिमाचल की भूमि, संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों को बाहरी व धनाढ्य लोगों के हाथों में जाने से बचाने का एक मजबूत सुरक्षा कवच रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों ने इस धारा के साथ छेड़छाड़ नहीं की, जबकि वर्तमान सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार हिमाचल को “ऑन सेल” करने पर आमादा है।
कमल गौतम ने कहा कि यदि धारा 118 में संशोधन किया गया तो पंचायत स्तर पर प्राप्त अधिकार भी समाप्त हो जाएंगे, जिससे सीधे तौर पर भू-माफिया को लाभ पहुंचेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पिछले तीन वर्षों में धारा 118 के तहत करीब 1100 अनुमतियां दे चुकी है। मंच ने सरकार से श्वेत पत्र जारी कर यह स्पष्ट करने की मांग की कि ये अनुमतियां किन व्यक्तियों को और किन उद्देश्यों के लिए दी गई हैं।
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि शिमला और मणिकर्ण जैसे क्षेत्रों में जंगलों के बीच बने कई कॉटेज क्या धारा 118 के तहत दी गई भूमि पर निर्मित हैं, या फिर इन्हें नियमित करने के उद्देश्य से ही यह संशोधन लाया जा रहा है। कमल गौतम ने मुख्यमंत्री से यह स्पष्ट करने की मांग की कि क्या यह संशोधन अवैध भूमि पर बने मस्जिदों और चर्चों को नियमित करने के इरादे से तो नहीं लाया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने संशोधन विधेयक को वापस नहीं लिया, तो प्रदेशभर में व्यापक जन आंदोलन छेड़ा जाएगा।
पत्रकार वार्ता के दौरान कमल गौतम ने शिमला के नेरवा क्षेत्र में अवैध मस्जिदों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि आरटीआई के माध्यम से प्राप्त जानकारी के अनुसार नेरवा में तीन मस्जिदें अवैध रूप से निर्मित हैं, इसके बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन ढांचों में अवैध गतिविधियां संचालित हो रही हैं और यह सब सरकार के संरक्षण में हो रहा है। हिंदू रक्षा मंच ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध ढांचों को शीघ्र हटाया जाए और कानून का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

