Jawali ,14:12:2025,NIAT Office– संपादक संपादक राम प्रकाश वत्स
उपमंडल क्षेत्र में लगातार हो रही विस्फोटक घटनाओं ने न सिर्फ आम लोगों को दहशत में डाल दिया है, बल्कि पूरे इलाके को संवेदनशील बना दिया है। बीते कुछ दिनों में गायों को निशाना बनाकर जिस तरह से विस्फोटक सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है, उसने इसे एक सामान्य दुर्घटना नहीं बल्कि किसी गहरी साजिश की ओर इशारा कर दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर मौत किस घात में बैठी है और इन घटनाओं के पीछे स्थानीय शरारती तत्व हैं या फिर कोई बाहरी शैतानी ताकत।
VIEDO——
अभी पनालथ पंचायत के देहरी गांव में विस्फोटक सामग्री से तीन गायों के जबड़े उड़ने की घटना लोगों के ज़ेहन से उतरी भी नहीं थी कि रविवार सुबह फारियां पंचायत के नजदीक झील क्षेत्र में एक और दिल दहला देने वाली वारदात सामने आ गई। यहां विस्फोटक पदार्थ को मुंह में लेने से एक अन्य गाय का जबड़ा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। घायल गाय की हालत देख ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया और वन्य प्राणी विभाग, बीबीएमबी, प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई संयोग नहीं है। आमतौर पर इस तरह के विस्फोटों का इस्तेमाल जंगली जानवरों के शिकार के लिए किया जाता है, लेकिन यहां बार-बार बेसहारा गायों को ही निशाना बनाया जा रहा है। इससे साफ संकेत मिलता है कि या तो कोई जानबूझकर इन पशुओं को नुकसान पहुंचा रहा है या फिर इलाके में खेती और गतिविधियों के विस्तार के साथ किसी आपराधिक मानसिकता ने सिर उठा लिया है।
ग्रामीणों ने बताया कि जब तक झील क्षेत्र में खेती नहीं की जा रही थी, तब तक इस तरह की घटनाएं कभी सामने नहीं आईं। जैसे ही झील किनारे खेती शुरू हुई, वैसे ही विस्फोटक वारदातें होने लगीं। इससे यह आशंका और गहरी हो गई है कि कहीं खेती से जुड़े हितों के टकराव में बेसहारा पशुओं को डराने या हटाने के लिए यह खतरनाक तरीका तो नहीं अपनाया जा रहा।
पर्यावरण प्रेमियों और पशु प्रेमियों ने भी इन घटनाओं पर कड़ा रुख अपनाया है। उनका आरोप है कि बेसहारा पशुओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी वन्य प्राणी विभाग, बीबीएमबी और प्रशासन की है, लेकिन इन संस्थाओं की लापरवाही के कारण निर्दोष पशु गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि झील किनारे हो रही खेती को तुरंत बंद नहीं करवाया गया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो वे संबंधित विभागों के खिलाफ आंदोलन और मोर्चा खोलने से पीछे नहीं हटेंगे।
सबसे बड़ा सवाल अब भी अनुत्तरित है—आखिर इन विस्फोटकों को कौन और क्यों रख रहा है? यदि समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो आशंका जताई जा रही है कि अगली बार कोई और बड़ा हादसा, यहां तक कि मानव जीवन भी इसकी चपेट में आ सकता है। क्षेत्र में भय का माहौल है और लोग प्रशासन से त्वरित, निष्पक्ष और कठोर जांच की मांग कर रहे हैं, ताकि इस खौफनाक सिलसिले पर जल्द विराम लग सके।

