Shimla,News India Aaj Tak. State Chief Bureau Vijay Samayal
हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों की सरगर्मी जैसे-जैसे तेज होती जा रही है, वैसे-वैसे राजनीतिक हलकों और ग्रामीण समाज में चर्चा भी गहराने लगी है। इसी पृष्ठभूमि में राज्य निर्वाचन आयोग का ताज़ा फैसला न केवल महत्वपूर्ण है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को सुनिश्चित करने वाला निर्णायक कदम भी माना जा रहा है।
पंचायत चुनाव से पहले सीमाओं पर कड़ी रोक
हिमाचल प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पंचायतों और नगर निकायों की सीमाओं में अब कोई बदलाव नहीं होगा। आयोग की अधिसूचना के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि चुनावी प्रक्रिया शुरू होते ही सभी सीमाएं फ्रीज मानी जाती हैं।
इस निर्णय ने पंचायत चुनावों के समय पर संपन्न होने की संभावना को और मजबूत किया है।
आदर्श आचार संहिता का दृढ़ हवाला
निर्वाचन आयोग ने अपने आदेश में आदर्श चुनाव आचार संहिता को आधार बनाया है।चूंकि चुनावी प्रक्रिया गति पकड़ चुकी है, ऐसे में किसी भी सीमा परिवर्तन को आचार संहिता के विरुद्ध माना जाएगा।इसी वजह से न तो कोई पंचायत बदलेगी, न किसी नगर निकाय की सीमाओं में संशोधन किया जाएगा।यह कदम सुनिश्चित करता है कि चुनावों की निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठे।
आयोग ने स्थिति की पूरी स्पष्टता के साथ रखी बात
शिमला में जारी अधिसूचना के बाद आयोग ने साफ कर दिया है कि—कोई नई पंचायत नहीं बनेगी-कोई पुरानी पंचायत विभाजित नहीं होगी-किसी नगर पंचायत या नगर निगम की सीमा में भी कोई फेरबदल नहीं होगा-सूत्रों अनुसार, सरकार की ओर से पहले कुछ नगर निकायों—विशेष रूप से नादौन नगर पंचायत और ऊना नगर निगम—की सीमा पुनर्निर्धारण प्रक्रिया शुरू हुई थी।-20 दिन की आपत्तियों की अवधि तय की गई थी, लेकिन आयोग की अधिसूचना के साथ ही यह पूरी प्रक्रिया रोक दी गई है।
पूरी प्रक्रिया पर तत्काल रोक
प्रदेश सरकार द्वारा की गई सीमा परिवर्तन संबंधी पहल पर आयोग का यह आदेश सीधा प्रभाव डालता है।नादौन और ऊना में जिन क्षेत्रों को परिवर्तन हेतु चिन्हित किया गया था, वे अब उसी स्थिति में बने रहेंगे।चूंकि चुनाव निकट हैं, इसलिए आयोग किसी प्रकार का प्रशासनिक उलझाव या भ्रम की स्थिति पैदा नहीं होने देना चाहता।
आयोग और विभाग ने मिलकर दी स्थिति की सफाई
उच्च न्यायालय में चुनाव से जुड़े मामले की चर्चा के बीच कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं।लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग और पंचायती राज विभाग—दोनों ने स्पष्ट कर दिया कि इस संबंध में उन्हें हाई कोर्ट से कोई नोटिस प्राप्त नहीं हुआ।अतः चुनावी प्रक्रिया पहले की तरह निर्धारित दिशा में आगे बढ़ रही है।
आयुक्त अनिल खाची का स्पष्ट संदेश
राज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची ने दो टूक कहा है कि—“आयोग की ओर से जारी अधिसूचना के बाद किसी भी प्रकार का सीमा परिवर्तन पूरी तरह प्रतिबंधित है। चुनावी प्रक्रिया के दौरान सीमाओं को फ्रीज कर दिया जाता है।”इस बयान के साथ ही पंचायती चुनावों की रूपरेखा अब लगभग तय मानी जा रही है।हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव लोकतांत्रिक ढांचे का आधार माने जाते हैं। आयोग का यह कदम न केवल पारदर्शिता और शुचिता के सिद्धांतों को मजबूत करता है, बल्कि यह सुनिश्चित भी करता है कि चुनाव समय पर हों, निष्पक्ष हों और बिना किसी विवाद या प्रशासनिक उलझन के संपन्न हों।सीमाएं अब तय हैं—अब बारी है लोकतंत्र के असली पर्व की, जहां जनता अपने जनप्रतिनिधि चुनने के लिए आगे आएगी।

