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एआई युग में बढ़ती गलत सूचनाओं के बीच प्रेस की विश्वसनीयता— एक सामूहिक जिम्मेदारीन

RamParkash Vats
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नई दिल्ली, 16 नवंबर 2025/ संपादन राम प्रकाश वत्स

राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय मीडिया केंद्र में आयोजित समारोह न केवल औपचारिक आयोजन था, बल्कि मीडिया के सामने खड़े सबसे कठिन प्रश्नों की गंभीर पड़ताल भी थी। इस वर्ष का विषय— “एआई युग में बढ़ती गलत सूचनाओं के बीच प्रेस की विश्वसनीयता की रक्षा”— समकालीन पत्रकारिता के मूल संकट की सटीक पहचान करता है।

समारोह का उद्घाटन करते हुए प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) की अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई ने अत्यंत स्पष्ट शब्दों में कहा कि चाहे कृत्रिम बुद्धि कितने भी उन्नत चरण तक पहुंच जाए, वह मानव चेतना के निर्णय, विवेक और उत्तरदायित्व का स्थान नहीं ले सकती। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पत्रकार का पहला दायित्व तथ्यों के प्रति निष्ठा और जनता के प्रति जवाबदेही है।

देसाई ने बताया कि पीसीआई तथ्य-जांच समितियों, निगरानी तंत्र और शिकायत निवारण प्रणालियों के माध्यम से गलत सूचनाओं पर नियंत्रण का प्रयास कर रहा है। साथ ही, पत्रकारों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ, बीमा सुविधाएँ और इंटर्नशिप कार्यक्रम भी मीडिया कर्मियों को अधिक सुरक्षित और सक्षम वातावरण प्रदान करने के लिए बनाए गए हैं।

प्रैस लोकतंत्र का नैतिक प्रहरी

समारोह के मुख्य वक्ता और प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) के सीईओ विजय जोशी ने सूचना-प्रवाह के मौजूदा वातावरण को ‘इंफोडेमिक’ की संज्ञा देते हुए कहा कि आज पत्रकारिता की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो चुकी है।उन्होंने दो टूक कहापारंपरिक मीडिया गति को नहीं, सटीकता को प्राथमिकता दे। और डिजिटल मीडिया एआई आधारित अनियंत्रित जुड़ाव की संस्कृति से स्वयं को मुक्त करे।”जोशी ने यह भी चेताया कि पेड न्यूज़, पक्षपातपूर्ण सामग्री और पीत पत्रकारिता ने जनता के विश्वास को गहरी चोट पहुंचाई है। डिजिटल प्लेटफॉर्मों का एंगेजमेंट-फर्स्ट मॉडल समाचार को सूचना नहीं, बल्कि उपभोग की वस्तु में बदल रहा है, जिससे समाज सूचना-बुलबुले और भ्रम के घेरों में कैद होता जा रहा है।महामारी काल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आधी-अधूरी सूचनाओं और झूठे दावों के मिश्रण ने आम लोगों को जिस तरह गुमराह किया, अब एआई उसकी तीव्रता कई गुना बढ़ाने में सक्षम है।उन्होंने याद दिलाया कि 99 समाचार पत्रों द्वारा स्थापित पीटीआई की बुनियाद सत्यता, निष्पक्षता, सटीकता और स्वतंत्रता पर टिकी है। और यही आधार पत्रकारिता की आत्मा है। उनके शब्दों में, “गति नहीं, सटीकता ही खबर की प्रतिष्ठा है।”

एआई युग में नैतिक पत्रकारिता की अनिवार्यता

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन, मंत्रालय के सचिव संजय जाजू तथा पीसीआई की सचिव शुभा गुप्ता भी उपस्थित रहे। वक्ताओं का मानना था कि एआई एक उपयोगी उपकरण अवश्य है, किंतु इसकी गलत दिशा में बढ़ने की क्षमता भी कहीं अधिक है।इसीलिए प्रेस की विश्वसनीयता बनाए रखना अब सिर्फ पत्रकारों का दायित्व नहीं रहा—यह समाज, संस्थानों, मीडिया संगठनों और पाठकों—सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।वक्ताओं ने जोर दिया कि भविष्य की पत्रकारिता का आधार केवल तकनीक नहीं, बल्कि नैतिकता होगी।फैक्ट-चेकिंग, बहु-स्तरीय सत्यापन, जवाबदेही और पारदर्शिता पर आधारित प्रशिक्षण—यह सब आने वाले समय में पत्रकारिता की रीढ़ बनेगा।

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