“बीएसएफ के एएसआई संजीवन कुमार ने बनाया विश्व रिकॉर्ड, बढ़ाया भारत का मान”
“सीमाओं के प्रहरी से विश्व विजेता तक: हिमाचल के ज्वाली (कुठेड) वीर संजीवन की प्रेरक कहानी”
“देशभक्ति की विरासत का अद्भुत उदाहरण — बीएसएफ जवान ने रचा इतिहास”
News India AajTak/ Sutra

देश की सीमाओं की सुरक्षा करने वाले हमारे जवान न केवल रणभूमि में पराक्रम दिखाते हैं, बल्कि अपने हुनर, जज्बे और प्रतिभा से भी भारत का नाम विश्व पटल पर रोशन करते हैं। ऐसा ही उदाहरण पेश किया है सीमा सुरक्षा बल (BSF) के एएसआई संजीवन कुमार ने, जिन्होंने अपने साथियों के साथ एक अद्भुत विश्व रिकॉर्ड बनाकर राष्ट्रीय गौरव को नई ऊंचाई दी है।
हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा की तहसील जवाली के गांव कुठेड़ के निवासी एएसआई संजीवन कुमार वर्तमान में मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित बीएसएफ 38वीं बटालियन में तैनात हैं। उन्होंने अपने दो साथियों – कांस्टेबल रविंद्र मिंडे (बीएसएफ 133 बटालियन) और कांस्टेबल सूरज हैम्मरम (बीएसएफ 32 बटालियन) – के साथ मिलकर बुलेट 350 सीसी मोटरसाइकिल पर उलटी दिशा में खड़े होकर 2 घंटे 11 मिनट में 73.2 किलोमीटर की दूरी तय कर एक अभूतपूर्व विश्व रिकॉर्ड बनाया। यह तीनों वीर वर्तमान में ग्वालियर की सीमा सुरक्षा अकादमी, टेकनपुर सीएसएमटी में तैनात हैं और देश की सेवा में निरंतर अग्रसर हैं।
संजीवन कुमार के अंदर देशभक्ति की भावना बचपन से ही प्रबल रही। उन्होंने न केवल बीएसएफ में भर्ती होकर अपने सपने को साकार किया बल्कि अपने जज्बे और समर्पण से देश का मान भी बढ़ाया। यह देशभक्ति उनके परिवार की विरासत रही है — उनके पिता उधम सिंह बीएसएफ से सेवानिवृत्त हैं, जबकि दोनों छोटे भाई भी बीएसएफ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं, जिनमें से एक अभी भी देश की सीमा की रक्षा कर रहा है। यह परिवार वास्तव में “देश सेवा के संस्कारों” का जीवंत उदाहरण है।

अपने इस अद्वितीय प्रदर्शन से संजीवन कुमार ने न केवल एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और बेस्ट ऑफ इंडिया रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज करवाया है, बल्कि यह दिखाया कि भारतीय सैनिक सिर्फ बंदूक से ही नहीं, अपने साहस, कौशल और अनुशासन से भी देश को गौरवान्वित कर सकते हैं। वर्ष 2018 में भी उन्होंने ग्वालियर बीएसएफ अकादमी में एक रिकॉर्ड स्थापित किया था, जिसके लिए उन्हें हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, विधायक अर्जुन ठाकुर और अधिकारी राजेश शर्मा द्वारा सम्मानित किया गया था।
संजीवन कुमार जैसे वीर सैनिक भारत के उस असली चरित्र को उजागर करते हैं, जिसमें “कर्तव्य, समर्पण और राष्ट्र प्रेम” सर्वोपरि है। उनका यह कार्य न केवल बीएसएफ के लिए गर्व की बात है, बल्कि हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है। ऐसे सैनिकों के समर्पण से ही हमारा भारत सुरक्षित, गौरवान्वित और विश्व पटल पर सशक्त बनकर खड़ा है। 🇮🇳

