ऊना, 31 अक्तूबर2025/ सूत्र
हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना के नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर-10 बैहली मोहल्ला में घटी यह दर्दनाक घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि छोटी-सी लापरवाही किस तरह किसी मासूम की जान ले सकती है। एक भारी-भरकम स्लाइडिंग गेट के नीचे दबने से 6 वर्षीय आशीष कुमार की मौत ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है। यह हादसा केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि समाज के लिए एक गहरी सीख है — सुरक्षा में लापरवाही कभी नहीं होनी चाहिए।
जानकारी के अनुसार, छोटा आशीष स्कूल से लौटते हुए अपने साथियों के साथ उसी गेट के पास खेल रहा था, जो असावधानी से लगाया गया था। अचानक गेट अपनी रेलिंग से खिसक गया और बच्चे पर जा गिरा। आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस हादसे ने परिवार की खुशियों को पलभर में मातम में बदल दिया।
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन सवाल यह है कि ऐसी घटनाएं बार-बार क्यों होती हैं? क्या सिर्फ किसी पर कानूनी कार्रवाई कर देना पर्याप्त है, या हमें खुद भी जागरूक और जिम्मेदार बनना होगा?
आजकल घरों और दुकानों में भारी-भरकम स्लाइडिंग गेट लगाने का चलन बढ़ गया है। ये गेट देखने में भले ही आधुनिक और मजबूत लगते हों, परंतु यदि इन्हें तकनीकी रूप से सही ढंग से नहीं लगाया गया या नियमित देखभाल नहीं की गई, तो ये मौत के फंदे बन सकते हैं। कई बार इन गेटों में लॉकिंग सिस्टम, रेलिंग स्टॉपर या बैलेंसिंग व्हील्स ठीक से नहीं लगाए जाते, जिससे जरा-सी ढिलाई बड़ा हादसा बन जाती है।
ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के उपाय :
स्लाइडिंग या ऑटोमैटिक गेट लगाने से पहले प्रमाणित तकनीकी विशेषज्ञ की मदद लें।
हर 3 से 6 महीने में गेट की मेंटेनेंस जांच करवाना अनिवार्य करें।
घरों में छोटे बच्चों को गेट या दरवाजों के पास खेलने से सख्ती से रोका जाए।
गेट के साथ सेफ्टी स्टॉपर और सेंसर लगाए जाएं ताकि वजन के खिसकने पर वह रुक सके।
स्थानीय प्रशासन को ऐसे मामलों में सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए नियम बनाने चाहिए।
यह घटना हमें यह सिखाती है कि लापरवाही कभी छोटी नहीं होती। एक ढीली पेंच, एक कमजोर रेलिंग, या एक असंतुलित गेट – सब किसी की जान ले सकते हैं। तकनीकी प्रगति के साथ सुरक्षा के प्रति सजगता भी उतनी ही जरूरी है।अगर समाज, परिवार और प्रशासन मिलकर जिम्मेदारी निभाएं, तो ऐसी त्रासदियां दोबारा न घटें।

