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नूरपुर विधानसभा और कांग्रेस नेतृत्व : एक राजनीतिक विश्लेषण

RamParkash Vats
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न्यूज़ इंडिया आजतक,11 सितम्बर 2025,Office Reportor

कांगड़ा जिला की राजनीति में हमेशा से विशेष महत्व रहा है। इस जिले के लगभग पन्द्रह विधानसभा क्षेत्र प्रदेश की राजनीति की दिशा और दशा तय करने में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। इन्हीं में से एक है नूरपुर विधानसभा क्षेत्र, जहां से कई दिग्गज नेताओं ने कांग्रेस संगठन का नेतृत्व किया। विशेषकर स्वर्गीय सत महाजन जी जैसे वरिष्ठ मंत्री ने नूरपुर को राजनीतिक पहचान दिलाने में ऐतिहासिक योगदान दिया।

(कांग्रेस की नेतृत्व नीति और ब्राह्मण समाज)

अगर 1952 से अब तक के राजनीतिक इतिहास का अध्ययन किया जाए तो यह तथ्य साफ़ है कि कांग्रेस ने नूरपुर विधानसभा क्षेत्र से ब्राह्मण समाज को कभी नेतृत्व का अवसर नहीं दिया। यह कांग्रेस की संगठनात्मक चूक भी कही जा सकती है। इसके उलट भारतीय जनता पार्टी ने ब्राह्मण समुदाय को लगातार महत्व दिया है। इसका उदाहरण डॉ. राजीव भारद्वाज हैं, जो कांगड़ा-चम्बा संसदीय क्षेत्र से सांसद रहे और हर बार भाजपा सरकारों में किसी न किसी महत्वपूर्ण विभाग में अध्यक्ष या उपाध्यक्ष की भूमिका निभाते रहे।

आज भी भाजपा की ओर से नूरपुर नगर परिषद के अध्यक्ष अशोक कुमार शर्मा शिबू सक्रिय नेतृत्व कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस इस मोर्चे पर पीछे रही। यही कारण है कि ब्राह्मण समाज में लंबे समय से यह मलाल रहा कि कांग्रेस संगठन ने उन्हें नूरपुर में उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया।

(बदलाव की ओर कदम : सुदर्शन शर्मा की नियुक्ति)

हालांकि हाल के वर्षों में कांग्रेस ने इस दिशा में पहल की है। वर्ष 2021 से कांग्रेस हाईकमान ने सुदर्शन शर्मा को प्रदेश प्रवक्ता का दायित्व सौंपा। यह निर्णय न केवल ब्राह्मण समुदाय को संगठन में मान्यता देने की दिशा में कदम है, बल्कि यह कांग्रेस की बदली हुई सोच का भी संकेत है।

(सुदर्शन शर्मा : उभरता हुआ चेहरा)

सुदर्शन शर्मा ने प्रदेश प्रवक्ता के रूप में अपनी भूमिका बखूबी निभाई है। उनकी खासियत है कि वे विपक्ष के हर मुद्दे पर निडरता से जवाब देते हैं और कांग्रेस की नीतियों को मजबूती से जनता के बीच रखते हैं। विपक्ष का डटकर मुकाबला करना अब उनकी पहचान बन चुका है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर कांग्रेस भविष्य में नूरपुर से ब्राह्मण समाज को नेतृत्व देती है, तो इससे संगठन को मजबूती मिलेगी और कांग्रेस की छवि में भी सकारात्मक बदलाव आएगा।

(मुख्यमंत्री की दृष्टि और भविष्य की संभावनाएँ)

अब सवाल यह है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू कब सुदर्शन शर्मा जैसे कर्मठ प्रवक्ता की कार्यशैली को देखेंगे और उन्हें नेतृत्व का अवसर देंगे। यदि 1952 के बाद पहली बार कांग्रेस इस समुदाय को नूरपुर से प्रतिनिधित्व देती है, तो यह न केवल ऐतिहासिक होगा बल्कि संगठन की मजबूती और सामाजिक संतुलन की दृष्टि से भी सबसे बड़ा कदम होगा।

गौरतलब है कि नूरपुर विधानसभा क्षेत्र का इतिहास गवाह है कि यहां से कांग्रेस ने कई नेताओं को जन्म दिया, परंतु ब्राह्मण समाज को प्रतिनिधित्व न देना एक बड़ी कमी रही। भाजपा की तुलना में यह कांग्रेस के लिए राजनीतिक नुकसान का कारण भी बना। ऐसे में सुदर्शन शर्मा जैसे नेताओं को आगे लाना कांग्रेस के लिए नूरपुर ही नहीं, बल्कि पूरे कांगड़ा और प्रदेश की राजनीति में नई ऊर्जा और संतुलन लाने का कार्य कर सकता है। आने वाले समय में यदि यह पहल जारी रहती है तो यह कांग्रेस संगठन

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