भरमाड़ (हिमाचल प्रदेश) न्यूज़ इंडिया आजतक, कार्यालय रिपोर्टर
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेशों के बाद राज्य सरकार ने प्रदेश भर में सरकारी भूमि पर किए गए अवैध कब्जों को खाली कराने के निर्देश जारी कर दिए हैं। इस फैसले से उन लोगों की नींद हराम हो गई है जिन्होंने दशकों से सरकारी भूमि पर अपने घर बनाए हुए हैं। प्रशासनिक स्तर पर अब कार्रवाई की तैयारियाँ शुरू हो गई हैं।
उपमंडल जवाली के अंतर्गत पंचायत सिद्धपुर घाड़ में भी इस आदेश के प्रभाव साफ़ देखे जा रहे हैं। यहां वन विभाग और जिला प्रशासन की भूमि पर महाशा समुदाय के लोग करीब आठ दशकों से अपने घर बनाकर रह रहे हैं। अब अदालत के निर्देश के बाद इन परिवारों पर उजड़ने का खतरा मंडरा रहा है।
महाशा बिरादरी के लोग कहते हैं कि उनके पुरखे वर्षों पहले इस क्षेत्र में बसे थे और तब से लगातार यहीं पर रह रहे हैं। पीढ़ियों से बसने के बावजूद अब उन्हें अपने घर उजड़ने की चिंता सताने लगी है। बिरादरी का कहना है कि उनके पास और कहीं जाने की जगह नहीं है, ऐसे में अगर घर उजाड़े गए तो वे पूरी तरह बेघर हो जाएंगे।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए महाशा समुदाय के प्रतिनिधियों ने प्रदेश सरकार से गुहार लगाई है। समुदाय का एक शिष्टमंडल कृषि एवं पशुपालन मंत्री चन्द्र कुमार से मिला और उनसे निवेदन किया कि जिस भूमि पर वे वर्षों से रह रहे हैं, उसे उनके नाम पर दर्ज किया जाए ताकि उनका आशियाना सुरक्षित रह सके।
मंत्री चन्द्र कुमार ने भी इस मामले को गंभीरता से सुना और उन्हें आश्वासन दिया कि वह संबंधित विभागों से बात करेंगे और यथासंभव समाधान निकालने का प्रयास करेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना नहीं की जा सकती।
फिलहाल प्रदेश भर में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रशासनिक कार्रवाई और प्रभावित परिवारों की चिंता के बीच सरकार के लिए यह बड़ा सामाजिक और राजनीतिक सवाल बनकर उभर रहा है कि न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए विस्थापित परिवारों को राहत कैसे देनी है।

