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सुक्खू सरकार का नया एजेंडा—जनकल्याण, सशक्तिकरण और समावेशी विकास की ओर एक ठोस कदम

RamParkash Vats
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शिमला 31 जुलाई 2025, चीफ़ ब्यूरो विजय समयाल

हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने एक बार फिर यह दर्शा दिया है कि उसकी प्राथमिकता केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर बदलाव लाना है। प्रदेश कैबिनेट की हालिया बैठक में लिए गए निर्णयों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार की नीतियों का फोकस ग्रामीण, जनजातीय और वंचित वर्गों की बेहतरी, महिला सशक्तिकरण, युवा रोजगार, और पारदर्शी प्रशासन की स्थापना पर है। आशा कार्यकर्ताओं के 290 नए पदों को भरने की मंजूरी, न सिर्फ स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूती देगी, बल्कि रोजगार की बाट जोह रही महिलाओं के लिए उम्मीद की नई किरण बनेगी।इस निर्णय के राजनीतिक अर्थ भी गहरे हैं—आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के दृष्टिगत सरकार ने ओबीसी आरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाया है। पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कर सटीक आंकड़ों के आधार पर आरक्षण रोस्टर तय करना, एक दूरदर्शी और न्यायसंगत नीति को रेखांकित करता है। यह सामाजिक न्याय की दिशा में सत्ताधारी दल का प्रतिबद्ध रुख दर्शाता है, जो आने वाले चुनावों में राजनीतिक समर्थन को भी मज़बूती प्रदान करेगा।युवा नीति और सामाजिक सुरक्षा का समावेशी मॉडलकैबिनेट द्वारा मानसून सत्र के आयोजन की सिफारिश और प्रतियोगी परीक्षाओं में ऊपरी आयु सीमा में दी गई दो साल की एकमुश्त छूट, सरकार की युवा केंद्रित सोच को परिलक्षित करती है। शिक्षा और तकनीकी संस्थानों में अनाथ बच्चों के लिए आरक्षित सीटें सामाजिक सरोकार और करुणा-नीति का प्रमाण हैं। यह पहल समाज के सबसे कमजोर तबके को मुख्यधारा में लाने की एक बड़ी और प्रशंसनीय कोशिश है।इसके अतिरिक्त सचिवालय में विधि अधिकारियों की नियुक्ति, अनुसंधान पदों की स्वीकृति और जनजातीय विकास परियोजनाओं को मजबूत करना, प्रशासनिक क्षमता में सुधार के संकेत हैं। सरकार प्रशासनिक ढांचे को सशक्त बनाकर विकास योजनाओं को प्रभावी क्रियान्वयन की ओर ले जा रही है।आपदा राहत से लेकर खनिज नीति तक—सरकार का बहुआयामी दृष्टिकोणमानसून की तबाही के बीच किराया सहायता की प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजना, सरकार के मानवीय दृष्टिकोण का परिचायक है। इससे यह स्पष्ट होता है कि आपदा में प्रभावित लोगों की गरिमा और आवश्यकताओं को केंद्र में रखते हुए योजनाएं बनाई जा रही हैं। इसी प्रकार, अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए डिस्टिलरी और बॉटलिंग यूनिट्स में होमगार्ड्स व आबकारी अधिकारियों की नियुक्ति, एक कानून-व्यवस्था आधारित दृष्टिकोण को दर्शाती है।खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता और राजस्व वृद्धि की नीति को बढ़ावा देते हुए, कैबिनेट द्वारा लघु खनिज खदानों की नीलामी से न सिर्फ राज्य के राजस्व में वृद्धि होगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे। इससे अवैध खनन पर नियंत्रण पाना आसान होगा, जो राज्य के प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम है।निष्कर्ष: सरकार की नीति में स्पष्टता और दृष्टिकोण में समावेशितासुक्खू सरकार की इस कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णय एकतरफा नहीं, बल्कि बहुपक्षीय दृष्टिकोण की पुष्टि करते हैं। चाहे वह स्वास्थ्य हो, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक न्याय या प्रशासनिक सुधार—हर पहलू पर ठोस कार्य योजना सामने आई है। यह नीतिगत निर्णय आने वाले समय में न केवल हिमाचल की विकास गति को तीव्र करेगा, बल्कि सत्तारूढ़ सरकार के जनाधार को भी सशक्त बनाएगा। स्पष्ट है कि सरकार अब घोषणाओं से आगे बढ़कर अमल की राजनीति कर रही है—जिसे जनता लंबे समय से देखना चाहती थी।

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