शिमला, 06/02026/ सूत्र : नई पेंशन योजना (एनपीएस) से जुड़ी घोषणा को लेकर राजकीय अध्यापक संघ ने केंद्र सरकार से अपना उत्तरदायित्व निभाने की मांग की है। संघ ने कहा है कि एनपीएस के तहत प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों की लगभग 12,000 करोड़ रुपये की जमा राशि अभी तक केंद्र स्तर पर लंबित है, जिसे शीघ्र जारी किया जाना चाहिए।
शिमला में आयोजित प्रेस वार्ता में संघ के राज्य अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान और महासचिव तिलक नायक ने कहा कि यह राशि कर्मचारियों और राज्य सरकार के अंशदान से जुड़ी हुई है, लेकिन लंबे समय से अटकी होने के कारण कर्मचारियों में असमंजस और चिंता का माहौल बना हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विषय किसी भी प्रकार से राजनीतिक नहीं, बल्कि कर्मचारियों के भविष्य, सामाजिक सुरक्षा और उनके विश्वास से जुड़ा हुआ है।
संघ पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) लागू किए जाने के बाद यह स्वाभाविक अपेक्षा है कि एनपीएस से संबंधित लंबित राशि पर केंद्र सरकार शीघ्र निर्णय ले। उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि आपसी संवाद, सहयोग और सहमति के माध्यम से इस मुद्दे का समाधान किया जाए, ताकि कर्मचारियों की आशंकाएं दूर हो सकें और प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर पड़ रहे अतिरिक्त दबाव को कम किया जा सके।
शिक्षकों की अन्य मांगें भी उठाईं:प्रेस वार्ता के दौरान राजकीय अध्यापक संघ ने कई अन्य मांगें भी सरकार के समक्ष रखीं। इनमें दो वर्ष की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों को वर्ष में दो बार नियमित करने, हाल ही में पदोन्नत प्रधानाचार्यों को शीघ्र स्टेशन आवंटित करने तथा प्रधानाचार्य पदोन्नति से वंचित पात्र अभ्यर्थियों के लिए सप्लीमेंट्री सूची जारी करने की मांग प्रमुख रही।
इसके अलावा कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस योजना के साथ मेडिकल अलाउंस को ओपन विकल्प के रूप में बहाल करने, हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा ली जा रही लेट फीस और पेनल्टी समाप्त करने तथा केंद्र सरकार की तर्ज पर प्रदेश में नया वेतन आयोग शीघ्र लागू करने की मांग भी दोहराई गई।
एसएमसी शिक्षकों को नहीं मिला वेतन, बढ़ी परेशानी:प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों सहित सीनियर सेकेंडरी विद्यालयों में स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के तहत कार्यरत सैकड़ों शिक्षकों को समय पर वेतन न मिलने का मुद्दा भी उठाया गया। संघ के अनुसार जनजातीय क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों को अक्तूबर, नवंबर और दिसंबर माह का वेतन अब तक नहीं मिला है।
शिक्षकों का कहना है कि वे नियमित रूप से सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक विद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं, रिक्त पदों वाले विषयों की पढ़ाई भी करवा रहे हैं और सरकारी कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें केवल 11 माह का वेतन मिलता है, वह भी समय पर नहीं। एसएमसी शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष हरीश ने सरकार से शीघ्र वेतन जारी करने और एलडीआर की अधिसूचना जल्द जारी करने की मांग की।
अनुबंध कर्मियों के नियमितीकरण में भेदभाव का आरोप:हिमाचल प्रदेश संयुक्त कर्मचारी महासंघ (एचपीएसकेएमएस) ने भी अनुबंध कर्मचारियों के नियमितीकरण में भेदभाव समाप्त करने की मांग उठाई है। महासंघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान और महासचिव हीरालाल वर्मा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को पत्र लिखकर नीति में संशोधन की मांग की है।
महासंघ का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में नियमितीकरण वर्ष में केवल एक बार मार्च माह में किया जा रहा है, जिससे समान परिस्थितियों में कार्यरत कर्मचारियों के बीच असमानता पैदा हो रही है। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के विरुद्ध बताते हुए नियमितीकरण को मासिक आधार पर लागू करने की मांग की, ताकि दो वर्ष की सेवा पूरी करते ही कर्मचारियों को नियमित किया जा सके।
संघों ने उम्मीद जताई कि केंद्र और राज्य सरकारें कर्मचारियों से जुड़े इन सभी मुद्दों पर गंभीरता और संवेदनशीलता दिखाते हुए शीघ्र न्यायसंगत निर्णय लेंगी।
केंद्र पर लंबित एनपीएस के 12 हजार करोड़, हिमाचल पर बढ़ता आर्थिक बोझ
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