स्वच्छता व्यवस्था की जांच और जवाबदेही तय करने की मांग, बीएमओ डॉ. ऋचा मेहरोत्रा बोलीं—मामले की होगी जांच

अस्पताल वह जगह है, जहां लोग बीमारी से राहत और बेहतर स्वास्थ्य की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। लेकिन आदर्श सिविल अस्पताल फतेहपुर की स्वच्छता व्यवस्था को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। वीडियो में दिखाई जा रही स्थिति को लेकर अस्पताल की साफ-सफाई और मरीजों को उपलब्ध कराए जा रहे स्वच्छ वातावरण पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, वीडियो में दिख रही स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए अस्पताल में साफ-सफाई और संक्रमण से बचाव के पर्याप्त इंतजाम बेहद जरूरी हैं। खासकर खांसी, सांस संबंधी समस्याओं और अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए स्वच्छ वातावरण उपचार का अहम हिस्सा है। ऐसे में सवाल उठता है कि अस्पताल में सफाई व्यवस्था की नियमित निगरानी कैसे होती है और किसी भी कमी के लिए जवाबदेही किसकी तय की जाती है।
जांच हो, जिम्मेदारी तय हो और व्यवस्था सुधरे
स्थानीय लोगों रमेश चंद, सुरेश कुमार, राजेश शर्मा, अशोक कुमार, संजीव कुमार, पवन कुमार, विजय सिंह, अजय कुमार, कुलदीप सिंह, मनोज कुमार, संदीप शर्मा, विनोद कुमार, मुकेश कुमार, राकेश सिंह, दीपक कुमार, अनिल शर्मा और सुनील कुमार ने मांग की है कि वायरल वीडियो की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए। उन्होंने कहा कि अस्पताल में सफाई की जिम्मेदारी संभालने वाले कर्मचारियों या संबंधित एजेंसी की कार्यप्रणाली की समीक्षा की जाए और यदि लापरवाही प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही, सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि मरीजों को इलाज के साथ स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण भी मिल सके।
मरीजों की सेहत से खिलवाड़ न हो
सरकारी अस्पताल आम जनता के उपचार का प्रमुख सहारा हैं। यहां आने वाला प्रत्येक मरीज बेहतर इलाज के साथ स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण की भी उम्मीद करता है। अस्पताल परिसर और वार्डों में नियमित सफाई, कचरे का उचित निपटान तथा संक्रमण से बचाव के प्रबंध सुनिश्चित करना जरूरी है। ऐसे में वायरल वीडियो ने अस्पताल की स्वच्छता व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
बीएमओ ने जांच का दिया आश्वासन
इस मामले में बीएमो फतेहपुर डॉ. ऋचा मेहरोत्रा ने कहा कि वायरल वीडियो से जुड़े मामले की जांच की जाएगी। जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अब लोगों की निगाहें स्वास्थ्य विभाग की जांच और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। उम्मीद है कि जांच में यदि कोई कमी सामने आती है, तो उसे दूर करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे, ताकि मरीजों को उपचार के साथ स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण भी मिल सके।

