लंपी बीमारी की चपेट में आए पशुओं में गंभीर लक्षण, खड़ोल में गाय की आंख की रोशनी प्रभावित होने से चिंता बढ़ी, पशु चिकित्सकों ने उपचार व सावधानी बरतने की दी सलाह।

लंपी बीमारी क्या है और पशुओं को क्यों होती है?
लंपी स्किन डिजीज (Lumpy Skin Disease) एक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से गाय और भैंस जैसे मवेशियों में होती है। यह बीमारी लंपी स्किन डिजीज वायरस के कारण होती है और इसका प्रसार मुख्य रूप से मच्छर, मक्खी, किलनी जैसे खून चूसने वाले कीटों के माध्यम से एक संक्रमित पशु से दूसरे पशु तक हो सकता है। बीमारी की चपेट में आने वाले पशुओं में तेज बुखार, शरीर पर गोल-गोल गांठें या फोड़े, त्वचा में सूजन, कमजोरी, भूख कम लगना और पैरों में सूजन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ गंभीर मामलों में आंखों और नाक से स्राव, मुंह में घाव तथा पशु की सामान्य स्थिति बिगड़ने की समस्या भी सामने आ सकती है। लंपी बीमारी का उपचार मुख्य रूप से पशु की स्थिति के अनुसार सहायक उपचार और लक्षणों को नियंत्रित करने पर आधारित होता है, क्योंकि यह वायरल बीमारी है और इसके लिए सामान्य एंटीबायोटिक वायरस को सीधे खत्म नहीं करते। पशु को साफ-सुथरे स्थान पर रखना, पर्याप्त पानी और पौष्टिक आहार देना तथा संक्रमित पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखना बेहद जरूरी है। पशुपालकों को बीमारी के लक्षण दिखाई देते ही पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। बीमारी से बचाव के लिए पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार टीकाकरण, पशुशाला की सफाई और मच्छर-मक्खियों की रोकथाम पर विशेष ध्यान देना चाहिए। किसी पशु की आंख प्रभावित होने या दृष्टि में कमी आने पर इसे केवल लंपी का सामान्य लक्षण मानने के बजाय तत्काल पशु चिकित्सक से जांच करवाना आवश्यक है।
पशुपालकों के लिए आपात कदम: पशु में तेज बुखार, शरीर पर गांठें या फोड़े, पैरों में सूजन, आंखों में सूजन अथवा आंखों की रोशनी प्रभावित होने जैसे लक्षण दिखाई दें तो पशुपालक तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें। संक्रमित पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें और उसके लिए अलग चारा-पानी की व्यवस्था करें। पशुशाला को साफ और सूखा रखें तथा मक्खी, मच्छर और अन्य कीटों की रोकथाम के उपाय करें। बिना पशु चिकित्सक की सलाह के कोई दवा या इंजेक्शन न दें। संक्रमित पशु को अनावश्यक रूप से इधर-उधर न ले जाएं, ताकि बीमारी दूसरे पशुओं में न फैले। पशु की हालत गंभीर होने, आंख में चोट या दृष्टि प्रभावित होने पर उपचार में देरी न करें। साथ ही आसपास के अन्य पशुओं की भी नियमित निगरानी करें और बीमारी के लक्षण सामने आने पर तत्काल विभाग को जानकारी दें।

लंपी की चपेट में पशु, आंख की रोशनी प्रभावित होने से पशुपालकों की चिंता बढ़ी
नूरपुर, फतेहपुर, जवाली और इंदौरा क्षेत्र में बीमारी के मामले सामने आने से पशुपालक चिंतित
कांगड़ा जिले के निचले क्षेत्रों में पशुओं में लंपी बीमारी के मामले सामने आने से पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है। नूरपुर, फतेहपुर, जवाली और इंदौरा क्षेत्र में कई पशुओं के इस बीमारी की चपेट में आने की बात सामने आई है। इसी बीच रप्पड़ पंचायत के गांव खड़ोल में एक गाय की हालत गंभीर होने का मामला सामने आया है। पशुपालक के अनुसार गाय के शरीर पर जगह-जगह फोड़े हो गए हैं और पैरों में भी सूजन है। बीमारी के दौरान उसकी एक आंख में गंभीर समस्या उत्पन्न हुई है। आंख की पुतली बाहर की ओर उभरी हुई दिखाई दे रही है और आंख का रंग सफेद पड़ गया है, जिसके चलते पशुपालक का कहना है कि गाय को उस आंख से दिखाई नहीं दे रहा।
गाय का उपचार गंगथ पशु चिकित्सालय से संबंधित स्टाफ द्वारा किया जा रहा है, लेकिन उसकी स्थिति अभी सामान्य नहीं हुई है। यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और पशुपालकों में इस बात को लेकर चिंता है कि लंपी बीमारी से गंभीर रूप से प्रभावित पशुओं में आंखों संबंधी जटिलताएं भी सामने आ सकती हैं। हालांकि, उक्त गाय की आंख की स्थिति सीधे तौर पर लंपी बीमारी के कारण ही हुई है या इसके पीछे कोई अन्य चिकित्सकीय कारण है, इसकी अंतिम पुष्टि पशु चिकित्सा विशेषज्ञों की जांच के बाद ही की जा सकती है।
गंगथ पशु अस्पताल की डॉक्टर तन्नू डोगरा और फार्मासिस्ट राजीव शर्मा ने बताया कि गंगथ अस्पताल के अधीन आने वाली 14 डिस्पेंसरी में लंपी बीमारी के करीब 60 से 70 मामले सामने आए थे। उपचार के बाद फिलहाल बीमारी नियंत्रण में बताई जा रही है। उन्होंने पशुपालकों से अपील की है कि पशुओं में लंपी बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर घबराने के बजाय तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करें। संक्रमित अथवा संदिग्ध पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखना बेहद जरूरी है, ताकि संक्रमण के फैलाव को कम किया जा सके।
पशु चिकित्सकों के अनुसार पशुपालकों को पशुओं के रहने वाले स्थान की साफ-सफाई, मक्खी-मच्छरों की रोकथाम और संक्रमित पशुओं की नियमित निगरानी पर विशेष ध्यान देना चाहिए। क्षेत्र में सामने आए खड़ोल के मामले ने एक बार फिर पशुओं की समय पर चिकित्सा और बीमारी की निगरानी की जरूरत को सामने ला दिया है। पशुपालकों का कहना है कि यदि किसी पशु की आंख, त्वचा या शरीर के किसी अन्य हिस्से में असामान्य बदलाव दिखाई देता है तो उसका तत्काल विशेषज्ञ से परीक्षण करवाया जाना चाहिए, ताकि बीमारी की सही वजह और उचित उपचार का पता लगाया जा सके।

