कांगड़ा घाटी रेल सेवा की बदहाली पर फूटा लोगों का गुस्सा, बोले—बार-बार बंद होती रेल से जनता और पर्यटन दोनों प्रभावित

रानीताल -संसदीय क्षेत्र कांगड़ा-चंबा चीफ ब्यूरो विनय महाजन की रिपोर्ट :पठानकोट-जोगिंदर नगर कांगड़ा घाटी नैरोगेज रेलमार्ग की लगातार बाधित रेल सेवा को लेकर क्षेत्रवासियों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। रानीताल में रेलवे के डीआरएम और स्थानीय लोगों के बीच रेल सेवा को लेकर तीखी नोकझोंक हुई। लोगों ने रेलवे प्रशासन के समक्ष सवाल उठाया कि आखिर कांगड़ा घाटी की ऐतिहासिक रेल सेवा को लेकर बार-बार ऐसी स्थिति क्यों पैदा हो रही है और हिमाचल के इस महत्वपूर्ण रेल संपर्क को स्थायी रूप से बहाल करने के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पठानकोट से जोगिंदर नगर तक चलने वाली यह ऐतिहासिक नैरोगेज रेल लाइन कांगड़ा और मंडी जिलों के लिए महज परिवहन का साधन नहीं, बल्कि क्षेत्र की सामाजिक, आर्थिक और पर्यटन व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी है। लोगों के अनुसार रेलगाड़ियां कुछ समय के लिए चलने के बाद फिर बंद हो जाती हैं, जिससे रोजमर्रा की यात्रा करने वाले यात्रियों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों, मरीजों और व्यापारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
कांगड़ा घाटी रेलमार्ग पर पठानकोट से जोगिंदर नगर तक कई महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन आते हैं। क्षेत्रवासियों के अनुसार इस रेल सेवा की सबसे बड़ी उपयोगिता यह है कि यह कम खर्च में लोगों को कांगड़ा घाटी के विभिन्न हिस्सों से जोड़ती है। रेल संपर्क बाधित होने से यात्रियों को निजी बसों और टैक्सियों पर निर्भर होना पड़ रहा है, जिससे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

शक्तिपीठों और धार्मिक पर्यटन के लिए भी महत्वपूर्ण रेलमार्ग
कांगड़ा घाटी रेलमार्ग का महत्व केवल स्थानीय आवागमन तक सीमित नहीं है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यह रेल लाइन देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए भी महत्वपूर्ण संपर्क माध्यम रही है। ज्वालामुखी रोड रेलवे स्टेशन के माध्यम से प्रसिद्ध श्री ज्वालामुखी मंदिर पहुंचा जाता है। इसी प्रकार कांगड़ा रेलवे स्टेशन से बज्रेश्वरी देवी मंदिर, चामुंडा मार्ग रेलवे स्टेशन से श्री चामुंडा नंदिकेश्वर धाम तथा बैजनाथ-पपरोला रेलवे स्टेशन से ऐतिहासिक बैजनाथ मंदिर क्षेत्र तक पहुंच बनाई जाती है।
स्थानीय लोगों का तर्क है कि इन धार्मिक स्थलों पर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। रेल सेवा सुचारु रहने से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलता है और स्थानीय होटल, टैक्सी, दुकानदार, ढाबे तथा अन्य छोटे कारोबार भी इससे लाभान्वित होते हैं।

चक्की दरिया पुल टूटने के बाद बढ़ी मुश्किल
अगस्त 2022 में भारी बारिश और बाढ़ के दौरान चक्की दरिया पर रेलवे पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद पठानकोट और हिमाचल के बीच रेल संपर्क को बड़ा झटका लगा था। इसके बाद इस ऐतिहासिक रेलमार्ग पर लंबे समय तक रेल सेवा प्रभावित रही। हालांकि विभिन्न चरणों में रेल संचालन बहाल करने के प्रयास हुए, लेकिन क्षेत्रवासियों का कहना है कि सेवा की निरंतरता और नियमितता अभी भी बड़ा सवाल बनी हुई है।
स्थानीय लोगों ने रेलवे प्रशासन से मांग की कि इस ऐतिहासिक रेलमार्ग को केवल पुरानी विरासत के रूप में न देखा जाए, बल्कि इसे क्षेत्र की वर्तमान जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जाए। रेल ट्रैक की सुरक्षा, पुलों की मजबूती, नियमित ट्रेन संचालन और यात्रियों की सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने की मांग की गई।

‘रेल सेवा बहाल होगी तो पर्यटन को मिलेगा नया जीवन’
स्थानीय लोगों का कहना है कि कांगड़ा घाटी में धार्मिक और पर्यटन स्थलों की बड़ी संख्या होने के बावजूद यदि सस्ता और सुविधाजनक रेल संपर्क नियमित रूप से उपलब्ध नहीं होगा तो इसका सीधा असर पर्यटन कारोबार पर पड़ेगा। लोगों ने सवाल उठाया कि जब देश में पर्यटन और कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने की बात की जा रही है, तो कांगड़ा घाटी की इस ऐतिहासिक रेल लाइन के स्थायी समाधान की दिशा में तेजी क्यों नहीं दिखाई जा रही।
रानीताल में डीआरएम के साथ हुई बातचीत और तीखी नोकझोंक ने एक बार फिर इस मुद्दे को सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया है। अब क्षेत्रवासियों की नजर रेलवे प्रशासन और केंद्र सरकार की अगली कार्रवाई पर है। लोगों की मांग साफ है—कांगड़ा घाटी रेलमार्ग को बार-बार बंद होने वाली सेवा नहीं, बल्कि नियमित और भरोसेमंद यातायात व्यवस्था बनाया जाए।

