
महमूदाबाद/सीतापुर।राज्य चीफ ब्यूरो अनुज कुमार जैन विकासखंड पहला क्षेत्र के पचदेवरा भान स्थित कंपोजिट विद्यालय में बच्चों को निशुल्क वितरित किए जाने वाली किताबें, स्कूल बैग और जूते गड्ढा खोदकर दफन किए जाने का मामला सामने आया है। विद्यालय परिसर में कथित रूप से सामग्री दफन किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी है और उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
यरल वीडियो में विद्यालय परिसर में गड्ढा खोदकर सामग्री निकाले जाने का दृश्य दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि विद्यालय परिसर में करीब तीन फीट गहरा गड्ढा खोदकर बच्चों के निशुल्क वितरण के लिए आई किताबें, स्कूल बैग और जूते दफन किए गए थे। बताया जा रहा है कि वायरल वीडियो करीब एक सप्ताह पुराना है।
जिलाधिकारी से की गई शिकायत
मामले को लेकर गांव निवासी राजेंद्र सिंह पुत्र मोहनलाल और कोमल कुमार पुत्र कमलेश ने जिलाधिकारी को लिखित शिकायत देकर पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ताओं ने विद्यालय के प्रधानाध्यापक एवं संबंधित स्टाफ की भूमिका की जांच कराने तथा दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।मामले की जानकारी बेसिक शिक्षा अधिकारी सीतापुर को दिए जाने पर उन्होंने बताया कि प्रकरण संज्ञान में आया है। मामले की जांच कराकर नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि प्रधानाध्यापक संजीव तिवारी और उनके सहयोगी शिक्षक द्वारा विद्यालय परिसर में गड्ढा खोदकर बच्चों के निशुल्क वितरण के लिए आई किताबें, स्कूल बैग और जूते दफन किए गए।
प्रधानाध्यापक ने बताया पुरानी और खराब सामग्री
वहीं, मामले में प्रधानाध्यापक संजीव तिवारी ने आरोपों पर अपना पक्ष रखते हुए बताया कि दफन की गई किताबें, जूते और स्कूल बैग वर्ष 2019 के सत्र के हैं। उनके अनुसार किताबों में दीमक लग चुकी थी और जूते व स्कूल बैग भी खराब हो चुके थे। इसी वजह से गड्ढा खोदकर उक्त सामग्री का निस्तारण किया गया।
वर्षों तक सामग्री पड़े रहने पर उठे सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सामग्री वर्ष 2019 की थी तो वह वर्षों तक विद्यालय में क्यों पड़ी रही। बच्चों को निशुल्क वितरित किए जाने के लिए उपलब्ध कराई गई सामग्री का समय से वितरण क्यों नहीं किया गया और खराब होने के बाद उसके निस्तारण के लिए विभागीय स्तर पर कौन-सी प्रक्रिया अपनाई गई, यह जांच का विषय है।
ग्रामीणों के अनुसार प्रधानाध्यापक संजीव तिवारी ने वर्ष 2017 में विद्यालय में कार्यभार ग्रहण किया था, हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
अब विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि सामग्री विद्यालय में कब पहुंची, कितने समय तक रखी रही और उसके निस्तारण में निर्धारित नियमों का पालन किया गया अथवा नहीं। जांच में यह भी सामने आना है कि बच्चों के लिए उपलब्ध कराई गई निशुल्क सामग्री का समय से वितरण क्यों नहीं हुआ और उसे विद्यालय परिसर में दफन करने का निर्णय किसके निर्देश पर लिया गया।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और बेसिक शिक्षा विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

