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पौंग बांध के सुरक्षा घेरे में सेंध! प्रतिबंधित क्षेत्र में जाल और नावों की घुसपैठ से मचा हड़कंप

RamParkash Vats
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राइट साइड बैरियर व रिजर्व एरिया तक पहुंच रहे मछुआरे, नो-बोटिंग/नो-फिशिंग क्षेत्र में गतिविधियों पर सुरक्षा तंत्र सतर्क; मत्स्य विभाग ने सभा को जारी किए सख्त लिखित आदेश

देश की महत्वपूर्ण जल संसाधन एवं विद्युत परियोजनाओं में शामिल पौंग बांध की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। महाराणा प्रताप सागर झील में बांध के राइट साइड बैरियर और रिजर्व एरिया जैसे संवेदनशील क्षेत्र में जाल लगाने और नावें ले जाने की लगातार सामने आ रही शिकायतों ने सुरक्षा तंत्र की चिंता बढ़ा दी है। जिस क्षेत्र में आम आवाजाही और नौकायन तक प्रतिबंधित है, वहां मछली पकड़ने के लिए पहुंचने की घटनाएं केवल नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि बांध की सुरक्षा से जुड़ा बेहद गंभीर विषय बन गई हैं।

सूत्रों के अनुसार प्रतिबंधित क्षेत्र में मछुआरों की आवाजाही का सिलसिला लंबे समय से सामने आ रहा था। खासकर शाम और रात के अंधेरे में नो-बोटिंग/नो-फिशिंग क्षेत्र में नाव ले जाकर जाल डालने की शिकायतों ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। मामला उच्च स्तर तक पहुंचने के बाद अब भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े तंत्र ने इसे गंभीरता से लेते हुए निगरानी और कार्रवाई तेज करने के संकेत दिए हैं।

सिर्फ मछली पकड़ना नहीं, बांध की सुरक्षा का मामला

पौंग बांध का बैरियर और रिजर्व एरिया सामान्य जल क्षेत्र नहीं है। यह बांध की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा संवेदनशील हिस्सा है। ऐसे क्षेत्र में बिना अनुमति नावों की आवाजाही और अनधिकृत व्यक्तियों की मौजूदगी को हल्के में नहीं लिया जा सकता। मछली पकड़ने की आड़ में कोई संदिग्ध व्यक्ति अथवा असामाजिक तत्व संवेदनशील क्षेत्र तक पहुंच जाए तो सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।यही वजह है कि प्रतिबंधित क्षेत्र में हो रही गतिविधियों को लेकर अब सुरक्षा तंत्र सतर्क हुआ है। हालांकि यह भी बड़ा सवाल है कि यदि लंबे समय से इस क्षेत्र में घुसपैठ हो रही थी तो सुरक्षा निगरानी व्यवस्था ने इसे समय रहते क्यों नहीं रोका?

मत्स्य विभाग ने सभा को थमाया सख्त लिखित आदेश

मामले की गंभीरता के बीच मत्स्य विभाग, पौंग जलाशय ने 30 सितंबर 2026 को खटियाड़ मत्स्य सहकारी सभा के प्रधान/सचिव को लिखित आदेश जारी किया है। इसमें सभा से जुड़े सभी मछुआरों को पौंग बांध से 1.5 किलोमीटर तक के प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं।विभाग ने साफ चेतावनी दी है कि प्रतिबंधित क्षेत्र में मछली पकड़ते पाए जाने पर जाल, नाव और पकड़ी गई मछली जब्त की जा सकती है तथा लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। इसके अलावा जलाशय प्रबंधन, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) और पौंग बांध सुरक्षा पुलिस द्वारा नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

मत्स्य विभाग ने माना—सुरक्षा कार्रवाई पुलिस के अधिकार क्षेत्र में

पौंग बांध मंडल के मत्स्य उपनिदेशक संदीप कुमार ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों से मिले इनपुट के बाद मछुआरों और मत्स्य सहकारी सभा को लिखित आदेश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा की दृष्टि से इस क्षेत्र में कार्रवाई करने का अधिकार वहां तैनात पुलिस और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों के पास है। मत्स्य विभाग अपनी ओर से नियमों के उल्लंघन पर आवश्यक कार्रवाई करेगा।

बीबीएमबी के मुख्य अभियंता बोले—उचित कदम उठाए जा रहे

वहीं भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के मुख्य अभियंता राकेश गुप्ता ने कहा कि प्रतिबंधित क्षेत्र में सामने आई गतिविधियों को लेकर उचित कदम उठाए जा रहे हैं। बांध की सुरक्षा को लेकर संबंधित स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

अब सवाल कार्रवाई पर

पौंग बांध जैसे संवेदनशील क्षेत्र में प्रतिबंधित इलाके तक नावों और जालों का पहुंचना सुरक्षा व्यवस्था के लिए चेतावनी से कम नहीं है। लिखित आदेश जारी होने के बाद अब असली परीक्षा सुरक्षा तंत्र की है। क्या प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश पूरी तरह रोका जाएगा? क्या रात के समय होने वाली गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी होगी? और क्या नियम तोड़ने वालों पर वास्तव में कड़ी कार्रवाई होगी?क्योंकि मामला महज मछली पकड़ने का नहीं है—यह देश की महत्वपूर्ण परियोजना और पौंग बांध की सुरक्षा से जुड़ा सवाल है। ऐसे में प्रतिबंधित क्षेत्र में किसी भी तरह की घुसपैठ को लेकर अब जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की जरूरत है।

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