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ज्वाली में 2027 की आहट, सत्ता और संगठन के बीच सियासी समीकरणों की परीक्षा

RamParkash Vats
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ज्वाली:हिमाचल प्रदेश की ज्वाली विधानसभा सीट पर 2027 के विधानसभा चुनाव से काफी पहले ही राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। विधानसभा क्षेत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक सक्रियता के साथ-साथ संगठनात्मक समीकरण भी चर्चा का विषय बनने लगे हैं। मौजूदा विधायक एवं कृषि मंत्री चंद्र कुमार के सामने जहां सरकार की उपलब्धियों और क्षेत्र में हुए विकास कार्यों को जनता तक पहुंचाने की चुनौती है, वहीं विपक्ष के सामने संगठन को मजबूत कर स्थानीय स्तर पर अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने का सवाल है।

ज्वाली विधानसभा का पिछला चुनाव दोनों प्रमुख दलों के बीच कड़े मुकाबले का गवाह रहा था।

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के चंद्र कुमार को 38,243 वोट मिले थे, जबकि भाजपा के संजय गुलेरिया को 35,212 मत प्राप्त हुए थे। चंद्र कुमार ने 3,031 मतों के अंतर से चुनाव जीता था। कांग्रेस का मत प्रतिशत 51.22 और भाजपा का 47.16 प्रतिशत रहा था। इससे पहले वर्ष 2017 में भाजपा के अर्जुन सिंह ने चंद्र कुमार को 8,213 मतों से हराया था। चुनावी आंकड़े बताते हैं कि ज्वाली में पिछले दो विधानसभा चुनावों में सत्ता का समीकरण बदला है और दोनों प्रमुख दलों के बीच मुकाबला महत्वपूर्ण रहा है।

बीडीसी चुनाव ने बढ़ाई संगठनात्मक चर्चा

वर्ष 2026 में ज्वाली ब्लॉक विकास समिति के चुनावों ने स्थानीय राजनीति को एक नया राजनीतिक संदर्भ दिया। द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार भाजपा से जुड़े पूर्व विधायक अर्जुन ठाकुर के समर्थित राजिंदर सिंह और मदन लाल क्रमशः बीडीसी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कांग्रेस समर्थकों तथा पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रहे संजय गुलेरिया से जुड़े समर्थकों ने चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया।इस घटनाक्रम के बाद ज्वाली में भाजपा के भीतर संगठनात्मक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हुई है। इसे केवल एक स्थानीय निकाय चुनाव के परिणाम के रूप में देखने के बजाय विधानसभा क्षेत्र की जमीनी राजनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। हालांकि बीडीसी चुनाव के परिणाम को सीधे विधानसभा चुनाव के परिणाम से जोड़ना उचित नहीं होगा। विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी, प्रदेश सरकार के कामकाज, स्थानीय मुद्दे, संगठन और मतदाताओं की प्राथमिकताएं अलग-अलग प्रभाव डाल सकती हैं।

कांग्रेस के सामने सरकार के काम को जमीन तक पहुंचाने की चुनौती

ज्वाली से कांग्रेस विधायक चंद्र कुमार प्रदेश सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ऐसे में आगामी समय में क्षेत्र में सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई, रोजगार और पर्यटन जैसे स्थानीय मुद्दे राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रह सकते हैं। जनता के बीच सरकार की योजनाओं और उनके वास्तविक क्रियान्वयन को लेकर चर्चा चुनावी माहौल को प्रभावित करने वाले मुद्दों में शामिल हो सकती है।सत्ता पक्ष के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण यह होगा कि सरकारी योजनाओं की घोषणा के साथ उनके क्रियान्वयन की स्थिति भी जनता के सामने स्पष्ट रहे। ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क सड़कें, पेयजल योजनाएं, स्वास्थ्य संस्थानों की सुविधाएं, किसानों से जुड़े मुद्दे और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर ऐसे विषय हैं जिन पर स्थानीय स्तर पर लगातार राजनीतिक चर्चा होती रही है।

भाजपा के सामने संगठन को एकजुट रखने का सवाल

दूसरी ओर भाजपा के लिए ज्वाली में संगठनात्मक एकजुटता महत्वपूर्ण विषय बनकर सामने आ रही है। वर्ष 2017 में भाजपा ने यह सीट जीती थी, जबकि 2022 में कांग्रेस ने वापसी की। अब 2027 के चुनाव से पहले भाजपा के सामने बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने, स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय मजबूत करने तथा जनता से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाने की चुनौती होगी।बीडीसी चुनाव में अर्जुन ठाकुर समर्थित खेमे की सफलता ने यह संकेत जरूर दिया है कि स्थानीय संगठनात्मक राजनीति में अलग-अलग नेताओं की सक्रिय भूमिका बनी हुई है। वहीं 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रहे संजय गुलेरिया भी ज्वाली की राजनीति में एक महत्वपूर्ण नाम रहे हैं। ऐसे में पार्टी के भीतर विभिन्न नेताओं की राजनीतिक सक्रियता आने वाले समय में स्थानीय समीकरणों को प्रभावित करने वाला विषय बन सकती है।

2027 से स्थानीय मुद्दों की राजनीति पर नजर

ज्वाली की राजनीति में आने वाले महीनों में केवल दलगत समीकरण ही नहीं, बल्कि स्थानीय मुद्दे भी महत्वपूर्ण होंगे। मतदाता विकास कार्यों की स्थिति, सरकारी संस्थानों की उपलब्धता, सड़क और परिवहन व्यवस्था, कृषि एवं पर्यटन से जुड़ी संभावनाओं तथा युवाओं के रोजगार जैसे विषयों पर राजनीतिक दलों से जवाब मांग सकते हैं।2022 के चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच 3,031 मतों का अंतर रहा था। इसलिए पिछले चुनाव के आंकड़े यह दिखाते हैं कि दोनों दलों के बीच मतों का अंतर बहुत बड़ा नहीं था। हालांकि आगामी चुनाव में परिस्थितियां अलग हो सकती हैं और वर्तमान आंकड़ों के आधार पर 2027 के परिणाम के बारे में कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

स्थानीय नेतृत्व की भूमिका होगी अहम

ज्वाली में राजनीतिक समीकरणों को समझने के लिए स्थानीय नेतृत्व की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी। कांग्रेस के पास मौजूदा विधायक और सरकार में मंत्री चंद्र कुमार का चेहरा है, जबकि भाजपा के पास पूर्व विधायक अर्जुन ठाकुर, 2022 के प्रत्याशी संजय गुलेरिया सहित स्थानीय संगठन में सक्रिय कई नेता हैं। आने वाले समय में इन नेताओं की क्षेत्रीय गतिविधियां, कार्यकर्ताओं के साथ संवाद और जनता के स्थानीय मुद्दों पर सक्रियता राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन सकती है।

फिलहाल ज्वाली में 2027 की चुनावी तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। टिकटों की घोषणा, संभावित प्रत्याशियों की स्थिति, दलों के संगठनात्मक फैसले और स्थानीय मुद्दों की दिशा आगे चलकर समीकरणों को प्रभावित करेंगे। इतना जरूर है कि पिछले चुनाव का करीबी मुकाबला और 2026 के स्थानीय निकाय चुनावों में सामने आए संगठनात्मक घटनाक्रम ने ज्वाली को कांगड़ा की महत्वपूर्ण राजनीतिक सीटों में बनाए रखा है।

आने वाला समय यह तय करेगा कि ज्वाली में राजनीतिक बहस किस दिशा में जाती है—सरकार के विकास कार्यों पर, विपक्ष की संगठनात्मक तैयारियों पर या स्थानीय नेतृत्व और टिकट की राजनीति पर। फिलहाल दोनों प्रमुख दलों के लिए बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करना और जनता के बीच अपनी राजनीतिक बात प्रभावी ढंग से रखना आने वाले चुनावी दौर की प्रमुख गतिविधियों में शामिल रहने की संभावना है।

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