Reading: पत्रकारिता के नाम पर बढ़ती गैर-जिम्मेदाराना ब्लॉगिंग पर लगे अंकुशतथ्यों की पुष्टि के बिना संवेदनशील मामलों में हस्तक्षेप समाज के लिए घातक

पत्रकारिता के नाम पर बढ़ती गैर-जिम्मेदाराना ब्लॉगिंग पर लगे अंकुशतथ्यों की पुष्टि के बिना संवेदनशील मामलों में हस्तक्षेप समाज के लिए घातक

RamParkash Vats
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NEWS INDIA AAJ TAk ,OFFICE REPORTER KAPIL SHARMA
आज सोशल मीडिया के दौर में ब्लॉगिंग और डिजिटल माध्यमों ने हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का मंच दिया है। यह लोकतंत्र के लिए सकारात्मक है, लेकिन कुछ लोग बिना तथ्य, बिना जांच और बिना पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों को समझे स्वयं को पत्रकार की भूमिका में प्रस्तुत करने लगे हैं, जो चिंता का विषय है।
यह बात सभी ब्लॉगरों पर लागू नहीं होती, बल्कि केवल उन लोगों पर है जो किसी भी संवेदनशील मामले में बिना पूरी जानकारी के टिप्पणी करते हैं, जांच एजेंसियों पर अनावश्यक दबाव बनाने का प्रयास करते हैं और सोशल मीडिया के माध्यम से भ्रम फैलाते हैं। किसी भी घटना की सच्चाई सामने लाने की एक कानूनी प्रक्रिया होती है, जिसमें पुलिस जांच, साक्ष्य और आवश्यक वैज्ञानिक परीक्षण शामिल होते हैं। जांच पूरी होने से पहले निष्कर्ष निकालना न केवल अनुचित है, बल्कि न्याय प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकता है।
पत्रकारिता का उद्देश्य तथ्यों की पुष्टि कर निष्पक्ष और जिम्मेदार जानकारी समाज तक पहुंचाना है। वहीं ब्लॉगिंग का उद्देश्य भी जागरूकता और सकारात्मक संवाद होना चाहिए, न कि सनसनी फैलाना या व्यक्तिगत प्रचार करना।
सोशल मीडिया का उपयोग यदि अश्लीलता, अफवाह, भ्रामक जानकारी, समाज में वैमनस्य या भ्रम फैलाने के लिए किया जाएगा, तो इससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित होगा। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी और कानून का पालन भी उतना ही आवश्यक है।
सरकार और संबंधित विभागों को ऐसे मामलों पर गंभीरता से ध्यान देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए। साथ ही, समाज को भी तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता तथा सकारात्मक ब्लॉगिंग को बढ़ावा देना चाहिए।
लोकतंत्र में स्वतंत्र अभिव्यक्ति महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है सत्य, जिम्मेदारी और कानून का सम्मान।

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