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स्थानांतरण आदेश बना मजाक? गैर जनपद ट्रांसफर के बावजूद वर्षों से एक ही थाने में तैनात दीवान, विभागीय व्यवस्था पर उठे सवाल

RamParkash Vats
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SITAPUR REPORTER अंकिता चतुर्वेदी

पुलिस विभाग में स्थानांतरण नीति को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। मानपुर थाने में तैनात दीवान अरविंद चौरसिया का गैर जनपद स्थानांतरण वर्ष 2021 में होने के बावजूद उनके क्षेत्र में सक्रिय रहने की चर्चा जोरों पर है। मामला तब और चर्चा में आ गया जब थाने से रवानगी होने के बाद भी उन्हें कस्बा मानपुर में ड्यूटी करते देखा गया।

सूत्रों के अनुसार जनपद में कई थानाध्यक्षों और पुलिसकर्मियों के तबादले समय-समय पर किए गए, लेकिन कुछ कर्मचारी वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं। ऐसे में स्थानांतरण प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्ष 2023 में भी सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं हुई थीं। आरोप है कि स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद भी संबंधित कर्मचारी की तैनाती को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।
मामले पर थानाध्यक्ष मानपुर आशुतोष मिश्रा ने बताया कि दीवान अरविंद चौरसिया की थाने से रवानगी हो चुकी है। हालांकि इसके बाद भी उन्हें कस्बे में ड्यूटी करते देखा गया है।
वहीं क्षेत्राधिकारी बिसवां ने सफाई देते हुए कहा कि आगामी मोहर्रम त्योहार के मद्देनजर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उन्हें अस्थायी रूप से ड्यूटी पर रोका गया है। त्योहार समाप्त होने के बाद स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी।
इस पूरे प्रकरण ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि स्थानांतरण वर्ष 2021 में हुआ था तो अब तक कार्यमुक्त क्यों नहीं किया गया? रवानगी के बाद भी ड्यूटी कैसे जारी रही? और स्थानांतरण नीति का अनुपालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

पुलिस नियमावली के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में स्थानांतरण आदेश के बाद निर्धारित समय के भीतर कार्यमुक्त होना आवश्यक होता है। विशेष परिस्थितियों में सक्षम अधिकारी की अनुमति से ही किसी कर्मचारी को रोका जा सकता है।
मामले पर पुलिस अधीक्षक सीतापुर अंकुर अग्रवाल ने कहा कि प्रकरण उनके संज्ञान में आया है। क्षेत्राधिकारी से रिपोर्ट मांगी गई है और जांच के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल त्योहार ड्यूटी के आधार पर स्थानांतरण अनिश्चितकाल तक नहीं रोका जा सकता, जब तक सक्षम स्तर से लिखित अनुमति न हो।
अब देखना यह होगा कि जांच के बाद विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है और स्थानांतरण नीति को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब कैसे देता है।

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