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1 डॉ. संजीव गुलेरिया बोले – फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट न जाए प्रदेश सरकार
2 महासंघ ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार इस फैसले के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट जाती है तो इसका राजनीतिक असर आगामी चुनावों में देखने को मिल सकता है।
3 उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों में होने वाली सभी छोटी-बड़ी भर्तियों को नियमित एवं पारदर्शी तरीके से किया जाना ही बेरोजगारी की समस्या का स्थायी समाधान है।

4 उन्होंने कहा कि आउटसोर्स व्यवस्था के तहत कार्यरत युवाओं को न तो पूरा वेतन मिलता है, न रोजगार की सुरक्षा और न ही भविष्य की कोई गारंटी। ऐसे में आउटसोर्स भर्ती व्यवस्था पर रोक लगाने का न्यायालय का निर्णय युवाओं के आर्थिक एवं मानसिक शोषण को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
5 महासंघ ने प्रदेश सरकार द्वारा बिना नियमों के की जा रही भर्तियों तथा शिक्षित बेरोजगार युवाओं के कथित शोषण पर भी चिंता व्यक्त की।
BHARMAR (JAWALI) 18 जून2026:,राम प्रकाश वत्स, संपादक NEWS INDIA आजतक
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा सरकारी भर्तियों और कर्मचारियों के हक में सुनाए गए फैसले का न्यु पेंशन स्कीम (NPS) दस वर्ष से कम सेवाकाल वाले सेवानिवृत कर्मचारी अधिकारी महासंघ ने पुरजोर स्वागत किया है। डाक्टर संजीव गुलेरीया प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि इस फैसले को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में न जाएं प्रदेश सरकार।*
उन्होंने कहा कि आउटसोर्स प्रथा में युवाओं को न तो पूरा वेतन मिलता है, न जॉब सिक्योरिटी और न ही कोई भविष्य की गारंटी। इसे बंद करने का हाइकोर्ट का फैसला युवाओं के आर्थिक और मानसिक शोषण को रोकने के लिए बेहद जरूरी है। महासंघ ने साफ किया है कि यदि सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाती है, तो इसका खामियाजा आगामी चुनाव में भुगतना होगा।
डाक्टर संजीव गुलेरीया ने कहा कि बिना किसी निश्चित और पारदर्शी नियम (Recruitment and Promotion Rules) के की जाने वाली भर्तियां हमेशा से विवादों और भाई-भतीजावाद के घेरे में रही हैं। कोर्ट का यह फैसला इस पर लगाम लगाने में मददगार साबित होगा। महासंघ ने प्रदेश सरकार द्वारा बिना नियमों के की जा रही भर्तियों और पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं के हो रहे कथित शोषण पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
इसके साथ ही, महासंघ ने वर्तमान प्रदेश सरकार और विपक्ष (भाजपा) दोनों को दो टूक नसीहत दी है कि, यदि कर्मचारियों और युवाओं के हितों की अनदेखी की गई, तो आगामी चुनावों में प्रदेश के युवा, उनके परिवार, आम जनता और पेंशन-विहीन कर्मचारी मिलकर दोनों प्रमुख दलों का सफाया कर देंगे। डाक्टर संजीव गुलेरीया ने भाजपा को भी चेताया की सत्ता में आने के सपने लेना छोड़े पहले प्रदेश हित, जनता हित्त , कर्मचारी हित्त , युवाओं के लिए रोजगार संसाधन उपलब्ध करवाने के लिए क्या रोड मैप है वो हिमाचल प्रदेश की जनता को बताया जाए।
हक न मिलने की स्थिति में प्रदेश का पढ़ा-लिखा बेरोजगार युवा पीढ़ी और बच्चों के मां-बाप परिवार, जनता, सेवारत कर्मचारी , पेंशन विहिन कर्मचारी जो सम्मानजनक पेंशन की राह देख रहे हैं अब चुप नहीं बैठेंगे और राज्य में एक मजबूत ‘तीसरा विकल्प’ सत्ता में लाने से पीछे नहीं हटेंगे। डाक्टर संजीव गुलेरीया ने कहा कि विभिन्न विभागों में होने वाली छोटी-बड़ी सभी भर्तियों को ‘नियमित (Regular)’ और पारदर्शी तरीके से किया जाना ही बेरोजगारी का सही और स्थाई समाधान है।
न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) के तहत दस वर्ष से कम सेवाकाल वाले सेवानिवृत्त कर्मचारी-अधिकारी महासंघ ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा सरकारी भर्तियों एवं कर्मचारियों के हित में दिए गए निर्णय का स्वागत किया है। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजीव गुलेरिया ने प्रदेश सरकार से आग्रह किया है कि वह इस निर्णय को चुनौती देने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का रुख न करे।
उन्होंने कहा कि आउटसोर्स व्यवस्था के तहत कार्यरत युवाओं को न तो पूरा वेतन मिलता है, न रोजगार की सुरक्षा और न ही भविष्य की कोई गारंटी। ऐसे में आउटसोर्स भर्ती व्यवस्था पर रोक लगाने का न्यायालय का निर्णय युवाओं के आर्थिक एवं मानसिक शोषण को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

