Reading: वित्तीय लाभ और पेंशन के नाम पर कर्मचारियों से टालमटोल बंद करे सरकार, हाइकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में मुकदमों पर फिजूलखर्ची प्रदेश हित में नहीं

वित्तीय लाभ और पेंशन के नाम पर कर्मचारियों से टालमटोल बंद करे सरकार, हाइकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में मुकदमों पर फिजूलखर्ची प्रदेश हित में नहीं

RamParkash Vats
4 Min Read

डाक्टर संजीव गुलेरीया, प्रदेश अध्यक्ष, न्यु पेंशन स्कीम सेवानिवृत दस वर्ष से कम कर्मचारी अधिकारी महासंघ हिमाचल प्रदेश ।

हिमाचल प्रदेश में कर्मचारियों, अधिकारियों और युवाओं के अधिकारों को लेकर आज स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है, यह कहना है दस वर्ष से कम सेवाकाल वाले सेवानिवृत कर्मचारी अधिकारी महासंघ हिमाचल प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष डॉ संजीव गुलेरीया का, उन्होंने ने कहा कि चाहे भाजपा की सरकार रही हो या वर्तमान कांग्रेस सरकार, जब भी कर्मचारियों और अधिकारियों को उनके वाजिब वित्तीय लाभ देने की बात आती है, तो सरकारें न्याय देने की जगह अदालतों के चक्कर काटने में समय और जनता का पैसा बर्बाद करती हैं।

​हाल ही में माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्तें अधिनियम 2024 को रद्द करने के हिमाचल हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखना, राज्य सरकार की नीतियों और कानूनी अदूरदर्शिता पर एक बड़ा सवालिया निशान है!
डाक्टर संजीव गुलेरीया ने कहा कि सरकारों की यह आदत बन चुकी है कि पहले हाईकोर्ट में केस लड़ती हैं, वहाँ हार मिलने पर भारी-भरकम फीस देकर वकीलों के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट का रुख करती हैं, और वहाँ से भी झटका मिलने के बाद ‘वित्तीय संकट’ का रोना रोती हैं।
डाक्टर संजीव गुलेरीया ने कहा कि ​जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों के मानकों में दोहरा रवैया आखिर क्यों ??
एक तरफ जहाँ आम कर्मचारियों को उनके हक का महंगाई भत्ता (DA), एरियर और पेंशन देने के समय सरकारें खजाना खाली होने का बहाना बनाती हैं, वहीं दूसरी तरफ जब विधायकों और सांसदों के वेतन-भत्ते बढ़ाने की बात आती है, तो सभी राजनीतिक दल एकजुट होकर ध्वनिमत से विधेयक पारित कर लेते हैं।
डाक्टर संजीव गुलेरीया ने कहा कि पाँच साल के लिए चुने गए जनसेवकों और जीवन भर राज्य की सेवा करने वाले कर्मचारियों के बीच यह दोहरा रवैया न्यायसंगत नहीं है।
डाक्टर संजीव गुलेरीया ने कहा कि ​अधिवक्ताओं की भारी-भरकम फीस से खजाने पर बोझ नहीं तो और क्या है, समय-समय पर मनोनीत होने वाले सरकारी महाधिवक्ताओं और बाहरी वरिष्ठ वकीलों को अदालती मामलों के लिए लाखों-करोड़ों रुपये की भारी-भरकम फीस दी जाती है।
क्या इस फिजूलखर्ची से प्रदेश के खजाने पर बोझ नहीं पड़ता?
*
डाक्टर संजीव गुलेरीया ने कहा कि यदि यही राशि कर्मचारियों के बकाये और पेंशन में इस्तेमाल की जाए, तो प्रदेश के हजारों परिवारों को राहत मिल सकती है।
​पुरानी पेंशन, कम सेवाकाल वाले सेवानिवृत्त कर्मचारी और युवाओं की अनदेखी सुक्खू सरकार ओपीएस (OPS) के वादे के साथ सत्ता में आई थी, लेकिन 10 वर्ष से कम सेवाकाल वाले सेवानिवृत्त कर्मचारियों की न्यायसंगत पद के अनुरूप सम्मानजनक पेंशन की मांग और सेवारत कर्मचारियों के डीए व भत्तों पर टालमटोल की नीति जारी है, जो कि सुक्खू सरकार के लिए आगामी चुनावों को देखते हुए कांग्रेस के लिए सकारात्मक संदेश नहीं है। डाक्टर संजीव गुलेरीया ने कहा कि इसके साथ ही प्रदेश के युवाओं के भविष्य के साथ आउटसोर्सिंग और ‘वन मित्र’ जैसी अस्थाई भर्तियों के नाम पर युव‌ओं के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। डाक्टर संजीव गुलेरीया ने कहा कि सरकार को तुरंत प्रभाव से सरकारी विभागों में खाली पड़े पदों पर स्थायी और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।
डाक्टर संजीव गुलेरीया ने ​सरकार को चेतावनी और सुझाव देते हुए कहा कि हिमाचल सरकार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सबक लेते हुए अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करना चाहिए। यदि कर्मचारियों, सेवानिवृत्त बुजुर्ग कर्मचारियों, अधिकारियों और बेरोजगार युवाओं की अनदेखी इसी तरह जारी रही, तो यह टालमटोल की नीति आगामी चुनावों में सरकार के लिए भारी नुकसान का कारण बन सकती है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को इस विषय पर गहनता से विचार करते हुए तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए।

Share This Article
Leave a comment
error: Content is protected !!