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शिलाई में हाटी मुद्दा और ओबीसी समाज: भ्रम नहीं, तथ्यों के आधार पर संवाद की आवश्यकता अरविंद शर्मा समाज सेवी एवं युवा नेता

RamParkash Vats
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सिरमौर/ 13 jun 2026 / DCB
शिलाई विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों हाटी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा मिलने के बाद आरक्षण और सामाजिक अधिकारों को लेकर कई तरह की चर्चाएं और बहसें चल रही हैं। दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि कुछ लोग इस संवेदनशील विषय को समाज के हित की बजाय राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे विशेष रूप से ओबीसी समाज के बीच भ्रम और आशंकाएं पैदा की जा रही हैं।
वास्तविकता यह है कि हाटी समुदाय को ST का दर्जा किसी अन्य वर्ग के अधिकार छीनने के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही एक संवैधानिक मांग को मान्यता देने के लिए दिया गया है। लेकिन कुछ लोगों द्वारा यह प्रचारित किया जा रहा है कि इससे ओबीसी वर्ग के अधिकार समाप्त हो जाएंगे या उनका आरक्षण खत्म हो जाएगा। ऐसे दावे तथ्यों से अधिक भावनाओं और राजनीति पर आधारित दिखाई देते हैं।
आज आवश्यकता इस बात की है कि समाज को डर और भ्रम के आधार पर नहीं, बल्कि संविधान, कानून और वास्तविक तथ्यों के आधार पर जागरूक किया जाए। भारत का संविधान प्रत्येक वर्ग के अधिकारों की रक्षा करता है और यदि किसी वर्ग को कोई व्यावहारिक कठिनाई आती है, तो उसका समाधान भी संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से ही संभव है।
शिलाई के पूर्व विधायक एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता बलदेव सिंह तोमर लगातार यह स्पष्ट करते रहे हैं कि किसी भी वर्ग के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। उन्होंने कई मंचों से यह भरोसा दिलाया है कि ओबीसी समाज की जायज चिंताओं का समाधान किया जाएगा और सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास होंगे। उनका स्पष्ट मत रहा है कि विकास और सामाजिक समरसता साथ-साथ चलनी चाहिए।
ओबीसी समाज को यह समझना होगा कि उनकी वास्तविक ताकत तथ्यों और संवैधानिक अधिकारों में है, न कि अफवाहों में। वहीं हाटी समाज को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि सामाजिक भाईचारा और सौहार्द बना रहे। दोनों समाजों के हित एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि क्षेत्र के विकास के लिए दोनों की साझी भूमिका महत्वपूर्ण है।
आज कुछ लोग समाज को जाति और वर्ग के आधार पर बांटकर राजनीतिक लाभ लेना चाहते हैं। लेकिन शिलाई और गिरिपार की पहचान सदियों से भाईचारे, सहयोग और आपसी सम्मान की रही है। यदि समाज आपसी विवादों में उलझ गया, तो सबसे बड़ा नुकसान युवाओं, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और क्षेत्र के विकास को होगा।
हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि राजनीतिक दल और नेता समय के साथ बदलते रहते हैं, लेकिन समाज और उसकी एकता स्थायी होती है। इसलिए किसी भी मुद्दे पर निर्णय भावनाओं, अफवाहों और भड़काऊ बयानों के आधार पर नहीं, बल्कि तथ्यों, कानून और सकारात्मक संवाद के आधार पर होना चाहिए।
शिलाई की जनता जागरूक और समझदार है। वह जानती है कि क्षेत्र का भविष्य संघर्ष और टकराव में नहीं, बल्कि एकता, विकास और आपसी विश्वास में है। यदि हाटी, ओबीसी, एससी, एसटी और सभी वर्ग मिलकर क्षेत्र के विकास की दिशा में कार्य करें, तो गिरिपार और शिलाई पूरे हिमाचल प्रदेश के लिए सामाजिक समरसता और विकास का उदाहरण बन सकते हैं।
“समाज को बांटकर वोट तो लिए जा सकते हैं, लेकिन विकास नहीं किया जा सकता। विकास और प्रगति का रास्ता हमेशा एकता, संवाद और विश्वास से होकर गुजरता है।”

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