Reading: अगर 15 जून को राजगढ़ में अचानक सायरन बजने लगे और राहत-बचाव टीमें दौड़ती नजर आएं, तो घबराइए मत… क्योंकि यह किसी वास्तविक आपदा का संकेत नहीं, बल्कि राज्य स्तरीय मेगा मॉक ड्रिल का हिस्सा होगा।

अगर 15 जून को राजगढ़ में अचानक सायरन बजने लगे और राहत-बचाव टीमें दौड़ती नजर आएं, तो घबराइए मत… क्योंकि यह किसी वास्तविक आपदा का संकेत नहीं, बल्कि राज्य स्तरीय मेगा मॉक ड्रिल का हिस्सा होगा।

RamParkash Vats
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राजगढ़ सिरमौर /जिला चीफ़ ब्यूरो

15 जून को राजगढ़ में बजेगा सायरन, राज्य स्तरीय मेगा मॉक ड्रिल में परखी जाएगी आपदा प्रबंधन की तैयारीबादल फटना, भूकंप और जंगल की आग जैसे आपदा परिदृश्यों पर होगा लाइव अभ्यास, प्रशासनिक तंत्र की त्वरित प्रतिक्रिया और समन्वय की होगी परीक्षाएंकर अगर 15 जून को राजगढ़ में अचानक सायरन की आवाज सुनाई दे और राहत-बचाव दल दौड़ते नजर आएं तो घबराने की जरूरत नहीं है। दरअसल यह किसी वास्तविक आपदा का संकेत नहीं बल्कि राज्य स्तरीय मेगा मॉक ड्रिल का हिस्सा होगा। इस अभ्यास के माध्यम से प्रशासन बादल फटना, भूकंप और जंगलों में आग जैसी संभावित आपदाओं से निपटने की अपनी तैयारियों को परखेगा।वीओ-1प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती चुनौतियों के बीच राजगढ़ में 15 जून को 10वीं राज्य स्तरीय मेगा मॉक ड्रिल आयोजित की जा रही है। हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के संयुक्त सहयोग से होने वाली इस ड्रिल का उद्देश्य आपदा की स्थिति में प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और उपलब्ध संसाधनों की प्रभावशीलता का आकलन करना है।वीओ-2मेगा मॉक ड्रिल की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए एसडीएम कार्यालय राजगढ़ में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता एसडीएम राज कुमार ठाकुर ने की, जिसमें राजस्व, स्वास्थ्य, पुलिस, अग्निशमन, लोक निर्माण, जल शक्ति, विद्युत, शिक्षा और अन्य विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया।बैठक में आपदा प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई और प्रत्येक विभाग को उसकी जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से सौंप दी गईं।वीओ-3प्रशासन द्वारा पहले ही टेबल टॉप एक्सरसाइज आयोजित की जा चुकी है। इस अभ्यास में संभावित आपदा स्थितियों को सामने रखकर विभागों की भूमिका तय की गई। संचार व्यवस्था, राहत एवं बचाव उपकरणों की उपलब्धता, एंबुलेंस सेवाएं, राहत शिविरों की व्यवस्था तथा इंसिडेंट रिस्पांस सिस्टम की कार्यप्रणाली का भी परीक्षण किया गया।वीओ-415 जून को होने वाली ऑन-फील्ड मॉक ड्रिल के दौरान वास्तविक आपदा जैसी परिस्थितियां निर्मित की जाएंगी। सबसे पहले सायरन बजाकर आपातकालीन स्थिति की सूचना दी जाएगी। इसके बाद राहत एवं बचाव दल सक्रिय होंगे और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, घायलों को प्राथमिक उपचार देने, अस्पतालों तक पहुंचाने, राहत शिविर स्थापित करने तथा आवश्यक सेवाओं को बहाल करने जैसी गतिविधियों का अभ्यास किया जाएगा।वीओ-5प्रशासन का मानना है कि इस तरह के अभ्यास न केवल आपदा प्रबंधन तंत्र की वास्तविक क्षमता को परखते हैं बल्कि कमियों की पहचान कर भविष्य के लिए सुधार की दिशा भी तय करते हैं। इसके साथ ही आम नागरिकों में आपदा के दौरान अपनाई जाने वाली सावधानियों और सुरक्षा उपायों को लेकर जागरूकता बढ़ाने में भी ऐसी ड्रिल महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।बाइट राज कुमार ठाकुर एसडीएम, राजगढ़

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