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चंबा में बारिश का कहर: फ्लैश फ्लड से भारी तबाही, सड़कें मलबे से पटीं, वाहन फंसे, घरों में घुसा पानी, कई संपर्क मार्ग बंद, राहत कार्य जारी।”

RamParkash Vats
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चंबा में बारिश का कहर: फ्लैश फ्लड से 64 मकान, 8 दुकानें क्षतिग्रस्त; 22 वाहन मलबे में दबे, 108 सड़कें बंद

Chamba se suiter; हिमाचल प्रदेश में मानसून एक बार फिर आफत बनकर बरसा है। चंबा जिले में भारी बारिश के बाद आए फ्लैश फ्लड ने कई इलाकों में तबाही मचा दी। जिले के सुल्तानपुर, परेल, सरोल और उदयपुर क्षेत्रों में बारिश ने जमकर कहर बरपाया है। अचानक उफने नालों ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं।

चंबा में तीन नालों में आई बाढ़ ने 64 मकानों और आठ दुकानों को नुकसान पहुंचाया है, जबकि 22 वाहन मलबे में दब गए हैं। तेज बहाव के साथ आए मलबे ने कई घरों और दुकानों में घुसकर भारी नुकसान किया।

सुल्तानपुर में घरों में घुसा पानी, रातभर दहशत में रहे लोग

सुल्तानपुर मोहल्ले में देर रात बारिश का पानी घरों में घुस आया। अचानक आई बाढ़ से लोगों में अफरातफरी मच गई। कई परिवारों ने पूरी रात जागकर गुजारी। मलबे में कई बाइक दब गईं और घरों में रखा सामान खराब हो गया।

परेल में मकान पर गिरे बड़े-बड़े पत्थर

परेल क्षेत्र में बारिश के बाद हालात और भयावह हो गए। पहाड़ी से खिसककर आए बड़े-बड़े पत्थर एक मकान पर जा गिरे। वहीं नाले का पानी भी घर के आसपास बहने लगा, जिससे मकान को काफी नुकसान पहुंचा।

108 सड़कें बंद, जनजीवन प्रभावित

लगातार बारिश के कारण प्रदेश में यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। भूस्खलन और बाढ़ के चलते हिमाचल में 108 सड़कें बंद हो गई हैं। इसके अलावा 38 पेयजल योजनाएं और नौ बिजली ट्रांसफार्मर प्रभावित हुए हैं।

मौसम विभाग ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट

मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश में 28 से 31 जुलाई तक कई क्षेत्रों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं मंडी, शिमला, सिरमौर और सोलन जिलों में अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) की आशंका को देखते हुए सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है।

प्रशासन अलर्ट, लोगों से सावधानी बरतने की अपील

प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे नदी-नालों, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और कमजोर पहाड़ी रास्तों से दूरी बनाए रखें।बारिश का कहर एक बार फिर पहाड़ी राज्य की चुनौती बनकर सामने आया है। चंबा की यह तस्वीर बताती है कि मानसून के दौरान पहाड़ों में प्रकृति के बदलते तेवर कितने खतरनाक साबित हो सकते हैं।

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