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हवलदार नरेश कुमार शर्मा पंचतत्व में विलीन, बेटे ने दी मुखाग्नि, गूंजे ‘भारत माता की जय’ के नारे

RamParkash Vats
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वीर हवलदार नरेश कुमार शर्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि

NEWS INDIA AAJ TAK EDITOR RA PARKASH VATS

सीमा पर खड़ा सैनिक जब वर्दी पहनता है, तब वह केवल अपने परिवार का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र का बेटा बन जाता है। उसकी हर सुबह मातृभूमि के नाम होती है और हर रात देश की सुरक्षा की शपथ के साथ बीतती है। सैनिक जानता है कि अगली छुट्टी मिलेगी या नहीं, यह उसके हाथ में नहीं; लेकिन वह इतना अवश्य जानता है कि अंतिम सांस तक उसका कर्तव्य केवल भारत माता की सेवा है।

हवलदार नरेश कुमार शर्मा (Army No. 10363064W), 610 DSC (Defence Security Corps), PLT (Attached to 40 Wing) भी ऐसे ही जांबाज सैनिक थे। ड्यूटी के दौरान अचानक ब्रेन स्ट्रोक ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। उनके साथियों ने बिना एक पल गंवाए अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी और उन्हें तत्काल सैन्य अस्पताल पहुंचाया। पांच दिनों तक जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष चलता रहा, लेकिन अंततः यह वीर सपूत मातृभूमि की गोद में सदा के लिए सो गया।

कहते हैं, सैनिक कभी अपने लिए नहीं जीता। दो महीने पहले जब नरेश कुमार घर आए थे, तब परिवार से मुस्कुराते हुए कहा था कि इस शुक्रवार छुट्टी लेकर फिर घर आऊंगा। परिवार ने भी उसी दिन की प्रतीक्षा में कई सपने सजा लिए थे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जिस बेटे के आने की राह मां-बाप, पत्नी और बच्चे देख रहे थे, वह तिरंगे में लिपटकर लौटा। यह दृश्य किसी भी परिवार के लिए सबसे बड़ा दर्द होता है, लेकिन यही एक सैनिक परिवार का सबसे बड़ा गर्व भी होता है।

नरेश कुमार केवल एक सैनिक नहीं थे, बल्कि एक खुशमिजाज, मृदुभाषी और मिलनसार इंसान थे। गांव का कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं था, जिसके सुख-दुख में उन्होंने साथ न दिया हो। समाज सेवा उनका स्वभाव था। उनके अधिकारी बताते हैं कि वे अपने कर्तव्य के प्रति पूरी ईमानदारी और अनुशासन से समर्पित रहते थे। यूनिट का हर जवान उन्हें अपना प्रिय साथी मानता था। यही एक सैनिक की सबसे बड़ी कमाई होती है—अपने साथियों का सम्मान और विश्वास।

जब उनका पार्थिव शरीर कांगड़ा जिले के ज्वाली उपमंडल की ग्राम पंचायत भरमाड़ पहुंचा, तो पूरा क्षेत्र शोक में डूब गया। काली मिट्टी मोक्षधाम में पूरे सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई। सैनिक सम्मान में तीन राउंड की गार्ड ऑफ ऑनर की सलामी ने हर आंख को नम कर दिया। उपस्थित अधिकारियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की, और हजारों ग्रामीणों ने “नरेश कुमार शर्मा अमर रहें” तथा “भारत माता की जय” के गगनभेदी नारों के साथ अपने वीर सपूत को अंतिम प्रणाम किया।

सबसे मार्मिक क्षण वह था, जब उनके बेटे ने कांपते हाथों से अपने पिता को मुखाग्नि दी। उस पल हर आंख नम थी, लेकिन हर सीना गर्व से भी भरा हुआ था। एक बेटे ने अपने पिता को विदा किया, लेकिन पूरे देश ने अपने एक सच्चे प्रहरी को खो दिया।

पंचायत प्रधान सुरेश कुमार खट्टा, पूर्व प्रधान सुशील कुमार, वीडीसी मदन लाल, उपप्रधान राजिन्द्र सिंह बुग्गा, वार्ड पंच सुशील कुमार शर्मा, शिब्बो थान प्रबंधक समिति, अंबिका महिला मंडल भरमाड़, सिद्ध बाबा शिब्बो थान रामलीला क्लब तथा क्षेत्र के अनेक सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की।

एक सैनिक की पहचान केवल उसकी वर्दी नहीं होती, बल्कि उसका त्याग होता है। वह अपने परिवार की खुशियों को पीछे छोड़कर देश की सुरक्षा को आगे रखता है। हवलदार नरेश कुमार शर्मा का जीवन हमें यही संदेश देता है कि मातृभूमि की सेवा सबसे बड़ा धर्म है। उनका बलिदान और उनका कर्तव्यनिष्ठ जीवन आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।

वीर कभी मरते नहीं, वे हर तिरंगे की लहर में, हर सलामी की गूंज में और हर भारतीय के हृदय में अमर हो जाते हैं।

शत्-शत् नमन, वीर हवलदार नरेश कुमार शर्मा।
आप अमर हैं… अमर रहेंगे।
जय हिन्द।

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