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रेणुका बांध विस्थापितों की मांग तेज, आवासहीनों को बाजार मूल्य मुआवजा, एफिडेविट शर्त हटाने पर सहमति, लंबित हक तुरंत दो, अन्यथा निर्माण विरोध की चेतावनी, समिति ने आभार जताया आज

RamParkash Vats
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सिरमौर,09 अप्रैल 2026,मुख्यालय हिमाचल न्यूज डेस्क, संपादक राम प्रकाश वत्स

सिरमौर जिला के श्री रेणुका जी क्षेत्र में प्रस्तावित राष्ट्रीय महत्व के रेणुका जी बांध को लेकर प्रभावितों की मांगें एक बार फिर तेज हो गई हैं। ददाहू में विधायक विनय कुमार द्वारा भूमि पूजन किए जाने के बीच रेणुका बांध विस्थापित संघर्ष समिति ने नाहन में प्रेस वार्ता कर अपनी स्थिति स्पष्ट की। समिति ने कहा कि आवासहीन परिवारों को वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार मुआवजा दिया जाना चाहिए और जब तक उनकी जायज मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ मांगों को स्वीकार करने पर सरकार का आभार जताया जाता है, लेकिन शेष मुद्दों पर जल्द कार्रवाई जरूरी है, अन्यथा बांध निर्माण का विरोध किया जाएगा।

समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि सरकार और बांध प्रबंधन ने आवासहीन लोगों की सूची जारी करने तथा एफिडेविट की शर्त हटाने पर सहमति जताई है। साथ ही मुआवजा राशि जारी करने का आश्वासन भी दिया गया है। संघर्ष समिति का कहना है कि भूमि हीन परिवारों को वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर मुआवजा मिलना चाहिए, ताकि वे नए स्थान पर सम्मानजनक जीवन शुरू कर सकें। इसके अतिरिक्त बिजली मीटर की शर्त को भी अमान्य करने की मांग उठाई गई है, क्योंकि कई प्रभावित परिवारों के पास यह सुविधा पहले से उपलब्ध नहीं है।

समिति अध्यक्ष विजय ठाकुर ने कहा कि विस्थापितों को उनके जायज हक दिलाने के लिए लगातार संघर्ष किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार ने कई मांगों को स्वीकार किया है, जो सकारात्मक कदम है, लेकिन अभी भी कई महत्वपूर्ण मुद्दे लंबित हैं। इन पर शीघ्र निर्णय लिया जाना आवश्यक है, ताकि प्रभावित परिवारों में असमंजस की स्थिति समाप्त हो सके और पुनर्वास की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ सके।

समिति सचिव योगेश ठाकुर ने बताया कि बांध प्रबंधन की ओर से प्रभावितों को स्थान खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि विस्थापन से पहले ददाहू क्षेत्र की तर्ज पर उचित मुआवजा और पुनर्वास पैकेज दिया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि प्रभावितों की जायज मांगें पूरी नहीं की गईं, तो संघर्ष समिति बांध निर्माण का विरोध करेगी। समिति ने सरकार से संवाद के माध्यम से समाधान निकालने और विस्थापितों के अधिकार सुरक्षित करने की मांग दोहराई।

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