Latest मेरा संपादकीय दृष्टिकोण News
संपादकीय: मंथन, चिंतन और विश्लेषण:हिमाचल प्रदेश में सरकार का बढ़ता आर्थिक वोट — योजनाओं की आड़ में राजनीतिक गणित
आर्थिक वोट की परिभाषा और बदलता राजनीतिक परिदृश्य:हिमाचल प्रदेश की राजनीति में…
संपादकीय मंथन, चिंतन और विश्लेषण: “गरीबों से छलावा और अमीरों की चांदी”सरकारी योजनाओं की पोल खोलती हिमाचल की फर्जी राशन सूची
राजनीतिक दबाव, रिश्तेदारी, वोट बैंक और स्थानीय सत्ता की सांठगांठ—इन चारों का…
संपादकीय मंथन, चिंतन और विश्लेषण—हर नई सरकार “खाली खजाने” की दुहाई देकर पांच साल काट देती है; न बेरोजगारी कम होती है, न कर्मचारियों का आक्रोश शांत होता है।
वित्तीय अनुशासन लागू करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति जरूरी है। कर्ज़ लेना…
हिमाचल प्रदेश में होमगार्ड कर्मचारी वर्षों से पुलिस विभाग के साथ हर मुश्किल में कंधे से कंधा मिलाकर ड्यूटी करते हैं। बावजूद इसके, 7 दशकों से इनके अधिकारों की अनदेखी की जा रही है।
News India Aaj Tak Office Bharmad, Editor Ram Prakash Vats होमगार्ड की…
(संपादकीय चिंतन ,मंथन और विश्लेषण: भाजपा में बढ़ती गुटबाजी—अनुशासन की कसौटी पर पार्टी की साख
अनुराग ठाकुर और जयराम ठाकुर, दोनों ही भाजपा के संपत्ति हैं —…
संपादकीय मंथन-चिंतन-विश्लेषण:“विकास का अर्थ तभी सार्थक होगा जब हर मजदूर यह कह सके — (I am not just alive, I am alive with dignity)“मैं सिर्फ जिंदा नहीं , सम्मानपूर्वक जिंदा हूं।”
जनहित योजनाओं का अधूरा सपना : व्यवस्था की जड़ में राजनीतिक दिखावा-सामूहिक…
एक ही जिले से चार मौतें: करवाचौथ से पहले उठी दर्दनाक सिसकियाँ
जीवन में कठिनाइयाँ आती हैं, पर हर जीवन अमूल्य है और किसी…
हिमाचल को “जल संरक्षण राज्य” के रूप में विकसित करने के लिए सरकार, समाज और नागरिक — तीनों को एक साथ कदम बढ़ाने होंगे। तभी हिमालय की गोद में फिर से गूंजेगा —”जहाँ जल बहे, वहाँ जीवन रहे।”
संपादकीय चिंतन ,मंथन और विश्लेषण-न्यूज़ इंडिया आजतक संपादक राम प्रकाश वत्स “जल-संरक्षण:…
संपादकीय चिंतन ,मंथन और विश्लेषण –चुनावी भाषणों का ज़हर: लोकतंत्र के स्वास्थ्य पर बढ़ता खतरा
विकास और जनहित के मुद्दों से दूर होती राजनीति; नेताओं की कटु…
संपादकीय चिंतन, मंथन और विश्लेषण —-जब आय संसाधन कम हों, तो करों का कहर बरसता है
संपादकीय लेख के मुख्य अंश जनता के लिए यह समझना मुश्किल हो…

