न्यूज इंडिया आजतक मुख्यालय हिमाचल डेक्स : संपादक राम प्रकाश बत्स
शिमला के छराबड़ा क्षेत्र से सामने आया एक वीडियो पत्रकारिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। वीडियो में स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि अपने पेशेवर दायित्व का निर्वहन कर रहे एक पत्रकार के साथ पुलिस कर्मियों द्वारा धक्का-मुक्की की गई। यह घटना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा आघात भी है।
खाकी वर्दी का अर्थ यह नहीं कि कानून की रक्षा के नाम पर पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार किया जाए। जिस समाज में पत्रकारों को सच दिखाने से रोका जाता है, वहां लोकतंत्र कमजोर पड़ने लगता है। बताया जा रहा है कि जिनके साथ यह व्यवहार हुआ, वे वरिष्ठ पत्रकार विकास सर हैं, जो लंबे समय से निष्पक्ष पत्रकारिता कर रहे हैं।
इस घटना के बाद पत्रकार जगत में गहरा आक्रोश व्याप्त है। पत्रकार संगठनों और समाज के बुद्धिजीवियों ने सरकार से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
लोकतंत्र में पत्रकारिता चौथा स्तंभ मानी जाती है। यदि इसी स्तंभ को दबाने का प्रयास होगा, तो यह केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरी पत्रकारिता का अपमान माना जाएगा। इसलिए सरकार को इस मामले का तुरंत संज्ञान लेकर न्यायसंगत कदम उठाने चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

