मुख्यकार्यालय भरमाड़ हिमाचल डेक्स संपादक राम प्रकाश बत्स
मंडी:मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम राजनीतिक मंच नहीं है, लेकिन भारी मन से यह कहना पड़ रहा है कि हिमाचल प्रदेश को अपने अधिकार के रूप में मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान बंद कर दिया गया है, जिससे राज्य की वित्तीय स्थिति पर गहरा प्रभाव पड़ा है। उन्होंने बताया कि यह अनुदान संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत दिया जाता था और वर्ष 1952 से पिछले 73 वर्षों से हिमाचल प्रदेश को निरंतर मिल रहा था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का संविधान विश्व के सबसे व्यापक और प्रगतिशील संविधानों में से एक है और यही हमारे लोकतंत्र की आधारशिला है। संविधान प्रत्येक नागरिक को मौलिक अधिकार देता है, जिससे उन्हें गरिमा, स्वतंत्रता और समानता के साथ जीवन जीने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि अधिकारों के साथ कर्तव्यों का पालन भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों का महत्व और बढ़ गया है। विधिक साक्षरता के माध्यम से समाज में न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों को और मजबूत किया जा सकता है। राज्य सरकार संविधान की भावना के अनुरूप समावेशी विकास और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और पारदर्शी प्रशासन पर विशेष ध्यान दे रही है, ताकि हर नागरिक को समान अवसर मिल सकें और लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत हों।

