शिमला, 14 मार्च 2026, चीफ ब्यूरो विजय समयाल
Himachal Pradesh High Court ने शिक्षा से जुड़े एक अहम मामले में स्पष्ट किया है कि शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) 2009 बच्चों को छह से चौदह वर्ष की आयु तक निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा की गारंटी देता है, लेकिन इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि चौदह वर्ष से अधिक आयु का कोई व्यक्ति स्कूल में पढ़ाई जारी नहीं रख सकता। अदालत ने इसी आधार पर एक याचिका को खारिज करते हुए संबंधित नियुक्ति को वैध ठहराया।
इस मामले की सुनवाई करते हुए Justice Ajay Mohan Goel ने अपने आदेश में कहा कि शिक्षा का अधिकार कानून का उद्देश्य समाज के प्रत्येक बच्चे को प्राथमिक शिक्षा से जोड़ना है, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रह जाए। न्यायालय ने कहा कि कानून का सावधानीपूर्वक अध्ययन करने पर यह स्पष्ट होता है कि इसमें कहीं भी ऐसा कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है, जो चौदह वर्ष से अधिक आयु के किसी व्यक्ति को विद्यालय में आठवीं कक्षा में प्रवेश लेने से रोकता हो।
दरअसल यह मामला हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में पार्ट टाइम मल्टी टास्क वर्कर की नियुक्ति से जुड़ा हुआ था। याचिकाकर्ता Pankaj Chauhan ने अदालत में याचिका दायर कर चयनित उम्मीदवार की नियुक्ति को चुनौती दी थी। उनका आरोप था कि चयनित व्यक्ति पहले आठवीं कक्षा में असफल हो गया था और बाद में चौदह वर्ष की आयु पार करने के बाद एक निजी विद्यालय से आठवीं कक्षा का प्रमाणपत्र प्राप्त किया, जो कथित रूप से शिक्षा के अधिकार कानून के विपरीत है।
हालांकि न्यायालय ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने पाया कि संबंधित उम्मीदवार के शैक्षणिक प्रमाणपत्र की जांच पहले ही सक्षम अधिकारियों द्वारा की जा चुकी है और उसकी प्रामाणिकता पर संदेह करने का कोई ठोस आधार उपलब्ध नहीं है।
न्यायालय के समक्ष यह भी तथ्य रखा गया कि याचिकाकर्ता ने पहले पार्ट टाइम मल्टी टास्क वर्कर योजना 2020 के तहत अपील दायर की थी। इस अपील को प्रथम अपीलीय प्राधिकारी ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि उसमें कोई ठोस और प्रमाणिक आधार नहीं है। इसके बाद याचिकाकर्ता ने स्कूल शिक्षा निदेशक के समक्ष भी अपील की, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिल सकी।
इन सभी आदेशों से असंतुष्ट होकर याचिकाकर्ता ने अंततः हाईकोर्ट का रुख किया। हालांकि विस्तृत सुनवाई के बाद अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल आयु के आधार पर किसी व्यक्ति की शिक्षा को अवैध नहीं ठहराया जा सकता। यदि कोई व्यक्ति किसी कारणवश समय पर पढ़ाई पूरी नहीं कर पाया और बाद में शिक्षा जारी रखता है, तो यह कानून के विरुद्ध नहीं है।
अंततः Himachal Pradesh High Court ने याचिकाकर्ता की सभी दलीलों को खारिज करते हुए याचिका को निरस्त कर दिया और संबंधित नियुक्ति को वैध माना। अदालत के इस फैसले को शिक्षा के अधिकार की व्यापक भावना के अनुरूप एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है, जो यह संदेश देता है कि शिक्षा प्राप्त करने का अवसर किसी भी आयु में बाधित नहीं होना
हिमाचल हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला : 14 वर्ष के बाद भी स्कूल में पढ़ाई पर कोई रोक नहीं
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