संकेतिक चित्र
शिमला , 09 फरवरी 2026, संपादक राम प्रकाश वत्स
हिमाचल प्रदेश से हाल ही में राज्यसभा के लिए निर्वाचित कांग्रेस नेता अनुराग शर्मा के खिलाफ चुनावी हलफनामे में संपत्ति की जानकारी छिपाने के आरोप लगे हैं। इस संबंध में धर्मशाला की अधिवक्ता निताशा कटोच ने निर्वाचन आयोग, राज्यसभा सचिवालय और हिमाचल प्रदेश विधानसभा के रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नामांकन के दौरान प्रस्तुत किए गए हलफनामे में चल और अचल संपत्तियों का पूरा विवरण नहीं दिया गया, जो चुनावी नियमों का उल्लंघन हो सकता है।
शिकायतकर्ता के अनुसार कांगड़ा जिले के बैजनाथ निवासी अनुराग शर्मा को 7 मार्च 2026 को हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्वाचित घोषित किया गया। आरोप है कि नामांकन पत्र के साथ जमा किए गए चुनावी हलफनामे में उनकी सभी संपत्तियों की सही जानकारी शामिल नहीं की गई।
अधिवक्ता निताशा कटोच का कहना है कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 33 के तहत किसी भी उम्मीदवार को नामांकन दाखिल करते समय अपनी तथा अपने परिवार की सभी चल-अचल संपत्तियों का पूर्ण विवरण देना अनिवार्य होता है। यदि कोई प्रत्याशी जानबूझकर जानकारी छिपाता है या अधूरी जानकारी देता है तो इसे कानून का उल्लंघन माना जा सकता है।
शिकायत में दावा किया गया है कि निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर अनुराग शर्मा द्वारा कुछ भूमि संपत्तियों का उल्लेख हलफनामे में नहीं किया गया। इन संपत्तियों में कांगड़ा जिले के बैजनाथ और मुल्थान क्षेत्रों के अलावा मंडी जिले के जोगिंदरनगर क्षेत्र में स्थित कुछ भूमि खातों का भी जिक्र किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इन संपत्तियों के खाता नंबर और संबंधित गांवों का विवरण भी शिकायत पत्र में संलग्न किया गया है।
इसके अलावा शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि नामांकन के साथ दाखिल दस्तावेजों में एक लाइसेंसी हथियार से संबंधित जानकारी भी सही ढंग से दर्ज नहीं की गई।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि अनुराग शर्मा नामांकन दाखिल करते समय सरकारी ठेकेदार के रूप में कार्य कर रहे थे और उनके नाम पर लोक निर्माण विभाग के लगभग 16 करोड़ रुपये के ठेके चल रहे थे, जिनके कार्य प्रगति पर बताए गए हैं। इस संदर्भ में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 9ए का हवाला देते हुए कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति का सरकार के साथ सक्रिय अनुबंध हो तो उसे चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माना जा सकता है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि किसी उम्मीदवार के नाम पर सरकारी अनुबंध लंबित हों तो स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही निर्वाचन प्रमाण पत्र जारी किया जाना चाहिए था। शिकायतकर्ता ने यह भी उल्लेख किया है कि चुनावी हलफनामे में गलत या अधूरी जानकारी देना जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 125ए के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आ सकता है।
अधिवक्ता निताशा कटोच ने निर्वाचन आयोग और संबंधित अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे।
गौरतलब है कि अनुराग शर्मा ने कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा सीट के लिए नामांकन भरा था और विपक्षी भाजपा द्वारा उम्मीदवार नहीं उतारे जाने के कारण उन्हें निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया। 68 सदस्यीय हिमाचल प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस के 40 और भाजपा के 28 विधायक हैं, जिसके चलते संख्या बल के आधार पर कांग्रेस उम्मीदवार की जीत पहले से तय मानी जा रही थी।
(स्रोत: शिकायत पत्र, निर्वाचन आयोग पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी व संबंधित पक्षों के बयान)

