संकेतिक चित्र संपूर्ण लेख को व्यां करता हुआ
न्यूज़ इंडिया आजतक संपादक राम प्रकाश में
मंडी की यह घटना केवल एक अपराध की खबर नहीं है, बल्कि समाज के बदलते मूल्यों और नशे के बढ़ते दुष्प्रभाव का भी आईना है। भारतीय शास्त्रों में नारी को शक्ति स्वरूपा कहा गया है। पौराणिक कथाओं में ऐसी अनेक घटनाएं मिलती हैं, जहां पत्नी ने अपने पति के प्राणों की रक्षा के लिए असंभव संघर्ष किया। इसका सबसे बड़ा उदाहरण सावित्री और सत्यवान की कथा है, जिसमें सावित्री ने स्वयं यमराज से संघर्ष कर अपने पति को मृत्यु के मुख से वापस ले आई थी। यह कथा भारतीय संस्कृति में पत्नी की निष्ठा, त्याग और शक्ति का प्रतीक मानी जाती है।
लेकिन वर्तमान समय में समाज की तस्वीर कहीं-कहीं बिल्कुल उलट दिखाई देने लगी है। कलयुग की विडंबना देखिए कि जहां कभी पत्नी अपने पति के प्राण बचाने के लिए देवताओं से भी लड़ जाती थी, वहीं आज नशे की गिरफ्त में आए परिवार ऐसे कदम उठा रहे हैं जो समाज को झकझोर देते हैं।
ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला मंडी के जिला कारागार से सामने आया है। यहां चिट्टे के मामले में सजा काट रहे एक कैदी को उसकी ही पत्नी जेल में नशा पहुंचाने का प्रयास करती पकड़ी गई। आरोपित महिला की पहचान(अमुकी के रूप में हुई है, जो अपने पति ( अमुक) से मिलने के लिए जेल पहुंची थी।
जेल प्रशासन के अनुसार महिला अपने साथ कुछ कपड़े लेकर आई थी और उसने पति को देने की बात कही। जब जेल कर्मचारियों ने सामान की नियमित जांच की तो एक पैंट के निचले हिस्से में बनाई गई विशेष जेब पर उनका ध्यान गया। शक होने पर जब उस जेब को खोलकर देखा गया तो उसमें एक छोटी पुड़िया बरामद हुई। जांच करने पर पता चला कि उसमें 1.03 ग्राम चिट्टा (सिंथेटिक ड्रग) छिपाया गया था।
जेल कर्मचारियों की सतर्कता के कारण यह नशा अंदर पहुंचने से पहले ही पकड़ लिया गया। इसके बाद महिला को तुरंत हिरासत में ले लिया गया और मामले की सूचना पुलिस को दे दी गई। जेल प्रशासन की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
यह घटना केवल कानून व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि समाज में तेजी से फैल रहे नशे की गंभीर समस्या को भी उजागर करती है। नशे की लत केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे परिवार को अपने जाल में फंसा लेती है। जब परिवार के सदस्य ही अपराध में सहयोग करने लगें, तो यह सामाजिक पतन की एक चिंताजनक स्थिति बन जाती है।
इस घटना ने एक बड़ा प्रश्न खड़ा कर दिया है कि आखिर हम किस दिशा में जा रहे हैं? जिस नारी को समाज में शक्ति, त्याग और संस्कार का प्रतीक माना गया, वही नशे के कारण अपराध के रास्ते पर चलने लगे तो यह केवल कानून का नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का भी विषय बन जाता है।
इसलिए आज आवश्यकता केवल कड़ी कानूनी कार्रवाई की ही नहीं, बल्कि समाज में नशा विरोधी जागरूकता, पारिवारिक मूल्यों की पुनर्स्थापना और युवाओं को सही दिशा देने की भी है। तभी हम उस आदर्श समाज की कल्पना कर सकते हैं, जहां नारी फिर से शक्ति, प्रेरणा और सदाचार का प्रतीक बनकर समाज का मार्गदर्शन करे।

