शिमला, 2 मार्च 2026/ राज्य ब्यूरो चीफ विजय समयाल
प्रदेश में पंचायत प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्रामीण प्रशासन की कमान अब अंतरिम प्रशासनिक समितियों के हाथों में सौंप दी गई है। 31 दिसंबर के उपरांत पंचायतों के भंग होते ही राज्य सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था लागू करते हुए पंचायत स्तर पर समितियों का गठन किया है। इन समितियों को विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखने तथा आवश्यक प्रशासनिक दायित्वों के निर्वहन की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य बाधित न हों।

सरकार द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार पंचायत सचिव अब चरित्र प्रमाण पत्र सहित अन्य आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन कर रहे हैं। विभाग ने इस प्रक्रिया को स्पष्ट और सरल बनाने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उद्देश्य यह है कि आम नागरिकों को प्रमाण पत्र या अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े और कार्य समयबद्ध ढंग से संपन्न हों।
खंड विकास अधिकारी फतेहपुर, सुभाषा अत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि नई व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने हेतु संबंधित थाना प्रभारियों के साथ भी समन्वय स्थापित किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक समितियां पंचायतों में लंबित और प्रगति पर चल रहे विकास कार्यों को अंतिम रूप देने में सक्रिय हैं तथा नियमित निगरानी सुनिश्चित की जा रही है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी पंचायत निवासी को दस्तावेज सत्यापन या अन्य प्रशासनिक कार्य में कोई समस्या आती है, तो वह संबंधित समिति अध्यक्ष अथवा सीधे खंड विकास अधिकारी कार्यालय फतेहपुर से संपर्क कर सकता है। प्रशासन का दावा है कि इस अंतरिम व्यवस्था से पारदर्शिता बनी रहेगी और विकास कार्यों में किसी प्रकार की रुकावट नहीं आने दी जाएगी।

