Reading: सरकारी स्कूलों में ‘शिक्षा सर्जरी’ की तैयारी, 145 स्कूल बनेंगे सीबीएसई पैटर्न पर आदर्श संस्थान

सरकारी स्कूलों में ‘शिक्षा सर्जरी’ की तैयारी, 145 स्कूल बनेंगे सीबीएसई पैटर्न पर आदर्श संस्थान

RamParkash Vats
4 Min Read

हिमाचल न्यूज़ डेस्क
मुख्यालय: भरमाड़, जवाली
संपादक: राम प्रकाश बत्स


शिमला:-हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में इस वर्ष केवल नया शैक्षणिक सत्र ही नहीं, बल्कि नई प्रशासनिक तस्वीर भी देखने को मिलेगी। प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। अप्रैल के पहले सप्ताह में राज्य के शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर तबादलों और पुनर्संरचना की प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी। यह महज रूटीन प्रशासनिक फेरबदल नहीं, बल्कि शिक्षा प्रणाली को नई दिशा देने की ठोस पहल मानी जा रही है।


सूत्रों के अनुसार प्रदेश के 145 चयनित सरकारी विद्यालयों को Central Board of Secondary Education (सीबीएसई) पैटर्न पर विकसित किया जाएगा। इन विद्यालयों में केंद्रीय बोर्ड का पाठ्यक्रम लागू होगा और उन्हें ‘आदर्श स्कूल’ के रूप में स्थापित करने की योजना है। शिक्षा विभाग ने इस परिवर्तन को सफल बनाने के लिए लगभग 10,000 शिक्षकों के कार्यक्षेत्र में बदलाव की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है।
चयनित 145 विद्यालयों में नियुक्ति पाने के लिए शिक्षकों को मेरिट और स्क्रीनिंग प्रक्रिया से गुजरना पड़ा है। विभाग का उद्देश्य स्पष्ट है—योग्य और विषय विशेषज्ञ शिक्षकों को उन विद्यालयों में तैनात किया जाए, जहां सीबीएसई पाठ्यक्रम के अनुरूप उच्च गुणवत्ता की शिक्षा दी जा सके।
दूसरी ओर, वर्षों से शहरी या सुविधाजनक स्थानों पर कार्यरत शिक्षकों को अब ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों की ओर रुख करना पड़ सकता है। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि शिक्षा में संतुलन और समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए यह कदम आवश्यक है।
राज्य के अनेक दूरदराज विद्यालय लंबे समय से स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं। कई विषयों में शिक्षक न होने के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। नई व्यवस्था के तहत विषयवार आवश्यकता का आकलन कर पदों का पुनर्विन्यास किया जा रहा है, ताकि किसी भी विद्यालय में शिक्षक की कमी न रहे।
सेवानिवृत्त हो रहे शिक्षकों के पद भी इसी प्रक्रिया के दौरान भरे जाएंगे। विभाग का लक्ष्य है कि नया शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही प्रत्येक कक्षा में शिक्षक उपलब्ध हो और विद्यार्थियों का समय व्यर्थ न जाए।
शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार के लिए समय-समय पर व्यवस्था में बदलाव आवश्यक होता है। वर्षों से एक ही स्थान पर कार्यरत स्टाफ के कारण कार्यप्रणाली में जड़ता आ जाती है। ऐसे में यह व्यापक फेरबदल शिक्षा प्रणाली में नई ऊर्जा का संचार करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीबीएसई पैटर्न अपनाने से छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहतर तैयारी का अवसर मिलेगा। साथ ही सरकारी विद्यालयों की छवि में भी सुधार आने की उम्मीद है।
स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने स्पष्ट किया है कि विभाग की प्राथमिकता है कि सभी नियुक्तियां और तबादले शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होने से पूर्व पूर्ण कर लिए जाएं। उनका कहना है कि बच्चों की पढ़ाई में किसी प्रकार की रुकावट न आए, यह सुनिश्चित करना विभाग की सर्वोच्च जिम्मेदारी है।

इस बार की प्रक्रिया में पारदर्शिता को प्राथमिकता दी जा रही है। सीबीएसई विद्यालयों के लिए शिक्षकों की योग्यता और अनुभव को मुख्य आधार बनाया गया है, जबकि अन्य तबादलों में उन विद्यालयों को प्राथमिकता दी गई है जहां स्टाफ की भारी कमी थी।
अप्रैल का पहला सप्ताह हिमाचल प्रदेश के हजारों शिक्षकों के लिए नई चुनौतियां और नई जिम्मेदारियां लेकर आने वाला है। यदि यह ‘शिक्षा सर्जरी’ सफल रही, तो प्रदेश के सरकारी विद्यालयों की तस्वीर बदलना तय माना जा रहा है। शिक्षा जगत की निगाहें अब इस बड़े प्रशासनिक निर्णय के परिणामों पर टिकी हैं।

Share This Article
Leave a comment
error: Content is protected !!