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कांग्रेस में बढ़ी अंदरूनी हलचल: वरिष्ठ नेता के इस्तीफे ने सरकार की कार्यशैली और जमीनी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा को लेकर खड़े किए बड़े राजनीतिक सवाल

RamParkash Vats
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HEADOFFICE HIMACHAL NEWS DESK EDITOR RAM PARKASH VATS

हिमाचल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के मुखर नेता और पूर्व विधायक Neeraj Bharti द्वारा हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष पद से दिए गए इस्तीफे ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। राजनीतिक आधार पर देखा जाए तो यह घटनाक्रम केवल एक संगठनात्मक पद छोड़ने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे कांग्रेस संगठन और सरकार के भीतर बढ़ती असंतुष्टि के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

नीरज भारती ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Vinay Kumar और जिला अध्यक्ष अनुराग शर्मा को भेजे अपने त्यागपत्र में स्पष्ट रूप से मौजूदा सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को सत्ता में वापस लाने के लिए हजारों कार्यकर्ताओं ने संघर्ष किया, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्हीं समर्पित कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हुई है। उनके अनुसार जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ता स्वयं को हाशिए पर महसूस कर रहे हैं और सरकार तथा संगठन के बीच संवाद की कमी लगातार बढ़ती जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में भारती का यह कदम कई मायनों में अहम माना जा रहा है। एक ओर यह कांग्रेस के भीतर पनप रही नाराजगी को उजागर करता है, वहीं दूसरी ओर यह भी संकेत देता है कि प्रदेश में आगामी राजनीतिक समीकरणों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। विशेषकर ऐसे समय में जब पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों के बाद प्रदेश में राजनीतिक सक्रियता बढ़ी हुई है, ऐसे इस्तीफे विपक्ष को भी सरकार पर हमले का अवसर प्रदान कर सकते हैं।

अपने पत्र में नीरज भारती ने मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu के नेतृत्व वाली सरकार की कार्यशैली को लेकर असंतोष जताया। उन्होंने लिखा कि बीते साढ़े तीन वर्षों में सरकार उन समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ताओं की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में पार्टी का झंडा मजबूती से उठाए रखा। यह बयान राजनीतिक रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कांग्रेस के अंदर समय-समय पर कार्यकर्ताओं की नाराजगी की खबरें सामने आती रही हैं।

हालांकि, राजनीति के जानकार इसे केवल नाराजगी का सामान्य प्रकरण मानने के पक्ष में नहीं दिख रहे। उनका मानना है कि नीरज भारती हमेशा से बेबाक राजनीतिक शैली के लिए जाने जाते रहे हैं और सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखने में पीछे नहीं हटते। ऐसे में उनका इस्तीफा कांग्रेस संगठन के भीतर संदेश देने की एक रणनीतिक राजनीतिक चाल के रूप में भी देखा जा सकता है। कई राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह दबाव की राजनीति का हिस्सा भी हो सकता है, जिससे संगठन और सरकार दोनों को जमीनी कार्यकर्ताओं की नाराजगी पर गंभीरता से विचार करना पड़े।

दूसरी ओर कांग्रेस संगठन की ओर से अभी तक इस इस्तीफे पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि पार्टी नेतृत्व नीरज भारती को मनाने का प्रयास कर सकता है, क्योंकि वह लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहे हैं और कुछ क्षेत्रों में प्रभावशाली राजनीतिक पकड़ रखते हैं।

हिमाचल की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में किस दिशा में जाएगा, यह देखने वाली बात होगी। लेकिन इतना तय है कि नीरज भारती का इस्तीफा प्रदेश कांग्रेस के लिए केवल एक संगठनात्मक मामला नहीं, बल्कि अंदरूनी असंतोष और कार्यकर्ता बनाम सत्ता के बीच बढ़ती दूरी पर उठे एक बड़े राजनीतिक सवाल के रूप में देखा जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि कांग्रेस नेतृत्व इस राजनीतिक संदेश को किस गंभीरता से लेता है और क्या पार्टी के भीतर संवाद स्थापित कर नाराजगी को शांत कर पाती है या नही

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