महमूदाबाद, सीतापुर/24 फरवरी 2026/ राज्य ब्यूरो चीफ़ अनुज कुमार जैन

रामकुंड चौराहे से लेकर तहसील परिसर तक सोमवार को आक्रोश की लपटें साफ दिखाई दीं। फिल्म प्रोड्यूसर संदीप तोमर द्वारा निर्मित प्रस्तावित फिल्म “यादव जी की लव स्टोरी” के विरोध में नागरिकों ने पैदल मार्च निकालकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यदि समय रहते इस फिल्म पर रोक नहीं लगाई गई, तो यह समाज में जातीय वैमनस्य और धार्मिक तनाव की चिंगारी भड़का सकती है।
हाथों में ज्ञापन और आंखों में रोष लिए लोग रामकुंड चौराहे से तहसील कार्यालय तक नारेबाजी करते हुए पहुंचे। उनका आरोप था कि मनोरंजन के नाम पर समाज को बांटने और भावनाओं से खिलवाड़ करने की साजिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उपजिलाधिकारी महमूदाबाद को सौंपे गए ज्ञापन में स्पष्ट मांग की गई कि इस फिल्म की विषय-वस्तु की तत्काल जांच कराई जाए और आवश्यक विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही यह ज्ञापन केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव को प्रेषित करने की मांग भी की गईग

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि फिल्म की कथित कहानी समाज के एक वर्ग को निशाना बनाकर प्रस्तुत की जा रही है, जिससे सामाजिक ताना-बाना कमजोर हो सकता है। उनका कहना था कि जब देश में शांति और सौहार्द की आवश्यकता है, तब इस प्रकार की फिल्में आग में घी डालने का काम कर सकती हैं। उन्होंने प्रशासन से सवाल किया कि आखिर किस उद्देश्य से ऐसी पटकथाओं को हरी झंडी दी जा रही है?
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि फिल्म में मुख्य भूमिका यूट्यूबर प्रगति तिवारी निभा रही हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लोकप्रिय चेहरों का उपयोग कर विवादित विषयों को बढ़ावा देना और भी अधिक चिंताजनक है, क्योंकि इससे युवाओं पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
हालांकि मार्च शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, लेकिन संदेश बेहद स्पष्ट था— समाज को बांटने की किसी भी कोशिश का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। प्रशासन ने ज्ञापन प्राप्त कर इसे उच्च स्तर पर भेजने का आश्वासन दिया है, किंतु लोगों ने साफ कहा है कि यदि ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
इस प्रदर्शन में अशोक वर्मा, राज यादव, डॉ. अखलेश वर्मा, यशपाल सिंह, आलोक आजाद, प्रवीण यादव, अभिषेक वर्मा, मोइन मंसूर, रमेश चंद गौतम, मुन्ना प्रधान, बबलू प्रधान, ओमप्रकाश (जल निगम), उपेंद्र यादव, नरेंद्र यादव, संतोष यादव, अनूप यादव सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
महमूदाबाद की सड़कों पर उठी यह आवाज केवल एक फिल्म का विरोध नहीं, बल्कि सामाजिक एकता की रक्षा का दावा करने वाला आक्रोश है — अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।

