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अभिव्यक्ति की आज़ादी में मर्यादा जरूरी: मुख्यमंत्री के विरुद्ध अभद्र पोस्ट पर युवक गिरफ्तार, सोशल मीडिया पर लापरवाही पड़ सकती है भारी

RamParkash Vats
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संकेतिक चित्र

मुख्यकार्यालय भरमाड़(जवाली) हिमाचल न्यूज़ रूम,संपादक राम प्रकाश वत्स

सूत्र:सोशल मीडिया आज अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है, लेकिन यह याद रखना होगा कि स्वतंत्रता के साथ कर्तव्य भी जुड़ा होता है। शब्दों की मर्यादा टूटते ही वही मंच कानून के शिकंजे में बदल जाता है। हालिया घटना इसका स्पष्ट उदाहरण है। जिला कांगड़ा के पुलिस थाना रक्कड़ के अंतर्गत चौली निवासी सुरेंद्र कुमार ने इंटरनेट मीडिया पर एक वीडियो प्रसारित किया, जिसमें सुखविन्द्र सिंह सुक्खू और उनके स्वजन के विरुद्ध अभद्र एवं आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया। वीडियो वायरल होते ही पुलिस ने त्वरित संज्ञान लिया और मामला दर्ज किया।
वीडियो को बाद में अकाउंट से हटा दिया गया, परंतु तब तक सैकड़ों लोग उसे डाउनलोड कर चुके थे। यही डिजिटल दुनिया की सच्चाई है—एक बार पोस्ट किया गया कंटेंट पल भर में व्यापक रूप से फैल जाता है और उसे पूरी तरह मिटाना लगभग असंभव हो जाता है।
पुलिस ने आरोपित ट्रक चालक को बद्दी के समीप हरियाणा सीमा से गिरफ्तार कर लिया है और न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। पुलिस अधीक्षक देहरा मयंक चौधरी ने गिरफ्तारी की पुष्टि की है।
यह घटना चेतावनी है कि अभिव्यक्ति की आज़ादी का अर्थ अराजकता नहीं है। लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना अधिकार है, परंतु अपशब्द और व्यक्तिगत आक्षेप कानूनन अपराध हैं। सोशल मीडिया पर लिखते या बोलते समय संयम, शिष्टाचार और कानूनी मर्यादा का पालन करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
डिजिटल युग में उंगली की एक क्लिक भविष्य तय कर सकती है—इसलिए बोलने से पहले सोचें, पोस्ट करने से पहले परखें, और याद रखें कि स्वतंत्रता के साथ उत्तरदायित्व भी अनिवार्य है।

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