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सदन में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू का बड़ा बयान: वित्तीय सुधार, जनकल्याण और आत्मनिर्भर हिमाचल प्रदेश की दिशा

RamParkash Vats
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मुख्यकार्यालय,भरमाड़(जवाली) हिमाचल न्यूज़ रूम संपादक राम प्रकाश वत्स

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार आज हिमाचल प्रदेश की चौदहवीं विधानसभा के ग्यारहवें सत्र के दूसरे दिन सदन की कार्यवाही के दौरान मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने महत्वपूर्ण वक्तव्य दिया। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में प्रदेश की आर्थिक स्थिति, विकास योजनाओं तथा जनकल्याणकारी नीतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार वित्तीय अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ अनावश्यक व्यय में कटौती की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूर्ववर्ती सरकार से विरासत में मिली आर्थिक चुनौतियों के बावजूद वर्तमान सरकार संतुलित और पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन की नीति पर कार्य कर रही है।

सदन में अपने वक्तव्य के दौरान मुख्यमंत्री ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन, कर्मचारियों के हितों और ग्रामीण विकास योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचाना है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार उन्होंने यह भी दोहराया कि शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए विशेष बजटीय प्रावधान किए जा रहे हैं।
ऊर्जा क्षेत्र का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि प्रदेश की विद्युत परियोजनाओं को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में नीति-स्तर पर निर्णय लिए जा रहे हैं, ताकि राज्य की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर हिमाचल की परिकल्पना को साकार करने के लिए पर्यटन, कृषि और हरित ऊर्जा को प्राथमिकता दी जा रही है।
विपक्ष द्वारा उठाए गए कुछ मुद्दों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार रचनात्मक सुझावों का स्वागत करती है, किंतु निराधार आरोपों से विकास की गति प्रभावित नहीं होने दी जाएगी। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री का वक्तव्य तथ्यों और आंकड़ों पर आधारित था तथा उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि पारदर्शिता और जवाबदेही सरकार की कार्यशैली का मूल आधार है।
सत्र के दूसरे दिन का यह संबोधन प्रदेश की आगामी नीतिगत दिशा को स्पष्ट करने वाला माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का आकलन है कि मुख्यमंत्री ने अपने वक्तव्य के माध्यम से आर्थिक सुधारों और जनहितकारी योजनाओं के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराने का प्रयास किया।

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