शिमला,11 फरवरी 2026,राज्य चीफ ब्यूरो विजय समयाल
हिमाचल प्रदेश को गहराते आर्थिक संकट से उबारने के लिए सुक्खू सरकार ने प्रशासनिक ढांचे में सर्जिकल हस्तक्षेप शुरू कर दिया है। दिल्ली से लौटने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट संकेत दिए कि अब सरकार दिखावे नहीं, बल्कि कठोर वित्तीय अनुशासन के रास्ते पर चलेगी। इसी कड़ी में आईएएस, आईपीएस और आईएफएस कैडर में पदों की संख्या घटाई गई है। आईएफएस के 110 पदों को कम कर 86 किया जाना इसी रणनीति का हिस्सा है। अधिकारी स्तर पर कटौती और निचले स्तर पर पद बढ़ाने का निर्णय प्रशासन को जनकेंद्रित और खर्च नियंत्रित बनाने की दिशा में उठाया गया कदम बताया गया है।
मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि प्रदेश को पूर्व भाजपा सरकार से 75 हजार करोड़ रुपये का कर्ज और 10 हजार करोड़ की देनदारियां विरासत में मिलीं। वहीं भाजपा शासनकाल में केंद्र से लगभग 70 हजार करोड़ की सहायता प्राप्त हुई, लेकिन उसका दीर्घकालिक वित्तीय प्रबंधन नहीं हुआ। अब राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) की समाप्ति से 2026 से हर वर्ष लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का संभावित नुकसान हिमाचल पर अतिरिक्त दबाव डालेगा।
सुक्खू ने भाजपा को नसीहत दी कि व्यक्तिगत हमलों के बजाय प्रधानमंत्री से मिलकर आरडीजी बहाली के लिए संयुक्त प्रयास करें। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत पर्वतीय राज्यों के विशेष अधिकारों की पैरवी का मुद्दा भी उठाया।
सरकार का दावा है कि भ्रष्टाचार पर लगाम और नीतिगत सुधारों से तीन वर्षों में 3,800 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित हुई है। पेंशन एरियर और कर्मचारियों के बकाये का भुगतान कर सरकार ने वित्तीय प्रतिबद्धता का संदेश दिया है।
स्पष्ट है कि हिमाचल की अर्थव्यवस्था अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि साझा प्रयास और सख्त आर्थिक अनुशासन से ही पटरी पर लौटेगी।
कैडर कटौती से खर्च नियंत्रण, आरडीजी बहाली पर भाजपा से एकजुट होकर पीएम से मिलने की अपील
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