Main Office (Bharmad) Himachal News Room/Sources
जिला शिमला से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। पहाड़ की शांत वादियों में युवाओं को नशे की अंधेरी सुरंग में धकेलने वाले अंतरराज्यीय ‘चिट्टा नेटवर्क’ का पर्दाफाश करते हुए शिमला पुलिस ने 11 दिनों के भीतर छह तस्करों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। गिरोह की जड़ें Punjab से लेकर नेपाल सीमा तक फैली मिली हैं।
मेंहदली पुल से खुली परतें
2 फरवरी को रोहड़ू के मेंहदली पुल के पास पुलिस ने नाकाबंदी के दौरान जश्नदीप सिंह और धर्मप्रीत सिंह को 83 ग्राम चिट्टा के साथ दबोचा। शुरुआती पूछताछ में दोनों ने खुलासा किया कि वे Punjab से नशे की खेप लाकर शिमला के ग्रामीण इलाकों में सप्लाई करते थे। बैंक खातों और डिजिटल लेन-देन की गहन जांच ने पुलिस को स्थानीय कड़ियों तक पहुंचा दिया।
‘छोटू’ बना मास्टरमाइंड
तफ्तीश में चिढ़गांव निवासी विजेंद्र मेहता उर्फ ‘छोटू’ का नाम सामने आया, जो इस नेटवर्क का कथित सरगना बताया जा रहा है। आरोप है कि वह पंजाब से चिट्टा खरीदकर रोहड़ू और चिढ़गांव के युवाओं को ऊंचे दामों पर बेचता था। गिरफ्तारी की भनक लगते ही वह नेपाल सीमा की ओर फरार हो गया।
नेपाल बॉर्डर पर 48 घंटे का ऑपरेशन
13 फरवरी को एएसपी मुख्यालय अभिषेक के नेतृत्व में रोहड़ू पुलिस की विशेष टीम ने उत्तराखंड और नेपाल पुलिस के साथ समन्वय कर बनवासा (नेपाल बॉर्डर) के पास सघन तलाशी अभियान चलाया। करीब 48 घंटे की लगातार कार्रवाई के बाद विजेंद्र को धर दबोचा गया।
स्थानीय युवाओं को बनाया मोहरा
मामले में आशीष चौहान, नवीन शेट्टा और दीवान चंद समेत कुल छह आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह पहले युवाओं को नशे का आदी बनाता और फिर उन्हें सप्लाई चेन का हिस्सा बना देता था।
फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने के लिए वित्तीय लेन-देन और कॉल डिटेल खंगाल रही है। पहाड़ में नशे के खिलाफ यह कार्रवाई बड़ी कामयाबी मानी जा रही है, लेकिन सवाल अब भी कायम है—आखिर इस जहर की खेप पहाड़ तक पहुंची कैसे?

