NEWS DESK/02 FEB 2026 EDITOR RAM PARKASH VATS
पूर्व मुख्यमंत्री और नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें अपनी नाकामियों का ठीकरा केंद्र सरकार पर फोड़ने के बजाय राज्य की वित्तीय स्थिति सुधारने पर ध्यान देना चाहिए। चुनावी वादों को पूरा करना केंद्र का दायित्व नहीं है, लेकिन कांग्रेस सरकार केंद्र प्रायोजित 191 योजनाओं में अपनी मात्र 10 फीसदी हिस्सेदारी देने से भी भाग रही है। जयराम ने कहा कि केंद्र सरकार 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य के आधार पर पूरे देश के लिए समान नीतियां बनाती है और इसका लाभ सभी राज्यों को समान रूप से मिलता है।
केंद्रीय बजट 2026-27 ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक बदलाव लेकर आया है। मनरेगा योजना को बंद कर नई योजना “विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण” लागू की जा रही है। इस योजना के लिए बजट में 95,692.31 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि पुरानी मनरेगा की लंबित देनदारियों और ट्रांजिशन अवधि के लिए अतिरिक्त 30,000 करोड़ रुपये दिए गए हैं। कुल मिलाकर दोनों योजनाओं का बजट सवा लाख करोड़ रुपये से अधिक है।
नेता विपक्ष ने कहा कि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में लगभग 1.72 लाख कार्य लंबित हैं और 655 पंचायतों में लोगों को एक दिन का भी रोजगार नहीं मिला। हिमाचल में मनरेगा मजदूरों की दिहाड़ी अगस्त से नहीं मिली है। नई योजना केवल मजदूरी का माध्यम नहीं बल्कि मिशन है, जिसमें अब ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों का रोजगार गारंटी दी गई है और भुगतान की अवधि 15 दिन से घटाकर साप्ताहिक कर दी गई है।जयराम ने कहा कि हिमाचल जैसे हिमालयी राज्यों के लिए केंद्र केवल 10 प्रतिशत हिस्सेदारी लेगा, लेकिन सुक्खू सरकार राजनीतिक कारणों और कुप्रबंधन के चलते इसे समय पर देने में विफल रही है। इसका सीधा खामियाजा प्रदेश की जनता भुगत रही है।

