Reading: बढ़ती आबादी और अवैध घुसपैठ देश की अर्थव्यवस्था व सुरक्षा पर सीधा प्रहार है। वोट बैंक की राजनीति राष्ट्रहित से बड़ा खतरा बन चुकी है।

बढ़ती आबादी और अवैध घुसपैठ देश की अर्थव्यवस्था व सुरक्षा पर सीधा प्रहार है। वोट बैंक की राजनीति राष्ट्रहित से बड़ा खतरा बन चुकी है।

RamParkash Vats
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NEWS INDIA AAJTAK EDITER RAM PARKASH VATS

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दुर्भाग्यपूर्ण पहलू यह है कि राजनीति में इन घुसपैठियों को एक “मजबूत वोट बैंक” के रूप में देखा जाने लगा है। सत्ता की राजनीति में कुछ राजनीतिक दलों का झुकाव देश की सुरक्षा और दीर्घकालिक हितों से अधिक तात्कालिक चुनावी लाभ की ओर दिखाई देता है। यह स्थिति यह प्रश्न खड़ा करती है कि क्या राजनीतिक दलों का विश्वास देश की जनता से अधिक ऐसे अवैध तत्वों पर हो गया है, जो देश की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक ताने-बाने के लिए खतरा बन सकते हैं।आज घुसपैठिये देश के कोने-कोने में फैल चुके हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों से लेकर महानगरों तक उनकी मौजूदगी देखी जा सकती है। इससे न केवल स्थानीय जनसंख्या पर आर्थिक दबाव बढ़ता है, बल्कि सामाजिक तनाव, अपराध और असुरक्षा की भावना भी जन्म लेती है। जब देश की सुरक्षा और आर्थिक स्थिति दांव पर हो, तब इस मुद्दे पर राजनीतिक चुप्पी या ढुलमुल रवैया और भी चिंताजनक हो जाता है।

प्रश्न यह है कि जब देश का नागरिक बनने के लिए नियम निर्धारित हैं और राजनीतिक दल संविधान व देश की सुरक्षा की शपथ लेते हैं, तो फिर यह दोहरा रवैया क्यों? क्या सत्ता की लालसा देशहित से ऊपर हो सकती है? लोकतंत्र में राजनीति का उद्देश्य जनता की सेवा और राष्ट्र की रक्षा होना चाहिए, न कि ऐसे तत्वों को संरक्षण देना जो भविष्य में देश के लिए संकट का कारण बनें।आवश्यक है कि जनसंख्या नियंत्रण, अवैध घुसपैठ पर सख्त कार्रवाई और नागरिकता के नियमों का ईमानदारी से पालन किया जाए। राजनीतिक दलों को अल्पकालिक लाभ से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में ठोस और साहसिक निर्णय लेने होंगे। तभी देश आर्थिक बोझ से मुक्त होकर सुरक्षित और संतुलित विकास की ओर बढ़ सकेगा।

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